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talis somadi churna, तालीस सोमादि चूर्ण

श्वास सम्बन्धी रोग जैसे दमा व् सर्दी-खांसी के लिए आयुर्वेद ने एक से बढ़ कर एक योग प्रस्तुत किये हैं. सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रन्थ 'रस तंत्र सार व् सिद्ध प्रयोग संग्रह' (द्वितीय खंड ) में प्रस्तुत किया गया योग 'तालीस सोमादि चूर्ण' ऐसे रोगियों के लिए बहुत ही उत्तम एवं लाभप्रद सिद्ध हुआ है. इसके घटक द्रव्यों में जो सोम नामक द्रव्य है वह श्वास रोग व् खांसी में प्रमुख असरकारक घटक द्रव्य है.

घटक द्रव्य (ingredients of talis somadi churna ) - तालीस पत्र, सोम , मुलहठी, अडूसे के फूल और पुष्कर मूल - पाँचों द्रव्य सामान वज़न में.
निर्माण विधि (preparation method of talis somadi churna ) - सब को अलग-अलग कूट पीस कर महीन चूर्ण करके मिला लें. इसे छन्नी से तीन बार छान लें ताकि सभी द्रव्य मिल कर एक जान हो जाएँ.
मात्रा और सेवन विधि (quantity and dosage of talis somadi churna ) - आधा ग्राम ( ४ रत्ती ) मात्रा में दिन में ३-४ बार थोड़े से शहद में मिला कर लेना चाहिए.

लाभ (advantages and health benefits of talis somadi churna ) - यह योग कफनाशक, ज्वरनाशक, मूत्रल और प्रतिश्याय (जुकाम ) को दूर करने वाला है. सर्दी और कफ प्रकोप के साथ होने वाली खांसी में, जिसमे गाढ़ा चीठा और जमा हुआ सफ़ेद या पीला कफ गिरता हो, यह योग विशेष लाभ करता है. सर व् छाती में भारीपन, अग्निमांध, मूत्र में कमी और पीलापन, शीतल वायु सहन न होना आदि लक्षण होने पर यह योग उत्तम काम करता है. बार बार श्वास का दौरा पड़ता हो, छाती कफ से भरी रहती हो और भरी रहती हो, बार बार खांसी आती हो, थोड़ा सा चलने या चढ़ने पर श्वास फूल जाता हो, शरीर शिथिल व् थका हुआ रहता हो, बार-बार खांसने पर भी कफ न निकल पाटा हो, श्वास वेग के कारण बात करना मुश्किल हो ऐसी स्थिति में ये योग तुरंत आराम देता है. पुराने रोगियों को आधा आधा ग्राम मात्रा में इसका सेवन २-३ माह या आराम न होने तक करना चाहिए. खटाई, तली चीजों और शीतल प्रकृति के पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. तालीस सोमादि चूर्ण बना बनाया इसी नाम से बाज़ार में मिलता है.

 

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