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सोयाबीन और आयुर्वेद हिंदी में: Soybean Ayurveda

सोयाबीन और आयुर्वेद हिंदी में: Soybean Ayurveda

सोयाबीन का शरीर और स्वास्थ्य पर प्रभाव

सोयाबीन का शरीर और स्वास्थ्य पर जितना अच्छा असर पड़ता है उतना अन्य किसी भी अनाज का नहीं पड़ता क्योंकि सोयाबीन ही एकमात्र ऐसा सौम्य पदार्थ है जिसमे प्रोटीन , वसा, कार्बोहाइडट्रेट, खनिज, लवण, कैलोरी आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. फिर भी सोयाबीन कब्ज़ नहीं करता बल्कि कब्ज़ निवारण करता है. सोयाबीन के सेवन में लाभ ही लाभ हैं. एक तो सस्ता, दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर, और क्या चाहिए. इसके सेवन से खून में अम्लता नहीं बढ़ती बल्कि यह खून को क्षार प्रधान बनाते हुए विजातीय द्रव्यों को बाहर करता है. इसकी यह विशेषता ही स्वास्थ्य की रक्षा करती है. इसके सेवन से कब्ज़ नहीं होता तो गैस भी पैदा नहीं होती. इसका प्रोटीन सहज सुपाच्य होने से यह बालक, वृद्ध, कमजोर, रुग्ण, गर्भवती और प्रसूता स्त्री, सभी के लिए बहुत उपयोगी है. इसका दही उदर विकार नष्ट करने, पेट और आँतों को साफ़ रखने और पाचनशक्ति ठीक रखने के लिए बहुत ही उत्तम है. यह एक सस्ता टॉनिक है जो शरीर के अंग-प्रत्यंग को स्वस्थ्य व् सबल रखता है. इसका प्रभाव पूरे शरीर पर बहुत अच्छा पड़ता है. जिन बच्चों की बाढ़ नहीं होती, शरीर का ठीक से विकास नहीं होता, उनके लिए तो यह एक कारगर टॉनिक है. इसके सेवन से बच्चों के शरीर में स्वस्थ कोष बनते हैं, दिमाग के ज्ञान तंतु बलवान होते हैं और उनकी देह सुन्दर सुडौल बनती है. यही एकमात्र ऐसा अनाज है जो बच्चों, खिलाडियों, दौड़ लगाने वालों, परिश्रम करने वाले मजदूरों, व्यापारियों और दिमागी काम करने वालों को ऊँची प्रोटीन और कैलोरी पर्याप्त मात्रा में प्रदान कर स्वास्थ्य और शरीर को पुष्ट और बलवान बनाता है.

सोयाबीन से सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ एवं व्यंजन बनाये जा सकते हैं जो अपेक्षाकृत सस्ते भी पड़ते हैं और पौष्टिक व् शक्तिवर्धक भी होते हैं. गरीब वर्ग के लिए तो सोयाबीन प्रकृति का वरदान ही है और हमें आश्चर्य है की भारतवासी इतने अच्छे खाद्य पदार्थसे अपरिचित और वंचित बने हुए हैं. biovatica .com चाहता है की देश के हर घर में सोयाबीन का उपयोग होने लगे और गरीब अमीर सभी वर्ग के लोग इस अद्भुत आहार से लाभ उठाने लगें.

सोयाबीन का आटा (Soyabean 's Aata or Atta )

सोयाबीन का आटा बनाने के लिए इसे शाम को पानी में १२ घंटे तक डाल के रखें. सुबह धुप में अच्छी तरह सुखा कर चक्की में पिसवा लें. चाहें तो इस आटे को गेहूं के आटे में मिला लें या फिर सिर्फ सोयाबीन के आटे की ही रोटी बनायें-खाएं तो बहुत ही पौष्टिक आहार होगा. एक बात का ख़याल रखें की सोयाबीन का आटा अधिक दिनों तक रखने पर ख़राब हो जाता है इसलिए कम समय के योग्य मात्रा में ही आटा तैयार करें. नए सोयाबीन का आटा अधिक स्वादिष्ट होता है. इसका स्वाद बादाम जैसा मधुर और रंग भी बादामी पीला होता है. इसके सामान पौष्टिक और कोई दूसरा अन्न नहीं. माँसाहारी लोग मांस की पौष्टिकता की बड़ी तारीफ़ करते हैं पर पोषक-आहार विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों सेसिद्ध होता है की एक किलो सोयाबीन आटा ढाई किलो मांस के बराबर पुष्टिदायक होता है और कमाल की बात ये है की इसमें वे दोष नहीं होते जो मांसाहार में होते हैं. आज़ादी के ७० वर्ष बीत जाने के बाद भी हमारा देश कई मामलों में पिछड़ा हुआ है. यही हाल सोयाबीन के मामले में भी है की जहाँ विश्व के अनेक देशों में सोयाबीन का भरपूर उपयोग किया जाता है वहां हमारेदेश में अधिकाँश लोग इसे जानते तक नहीं. विदेशों में लोग मांसाहार छोड़ कर शाकाहारी हो रहे हैं और सोयाबीन के केक, बिस्कूट, ब्रेड आदि खा रहे हैं. हमारेदेश केगरीब लोग पोषक आहार तो क्या, दो वक़्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं. यदि वे सोयाबीन का सेवन करने लगें तो सस्ते दामो में पौष्टिक आहार प्राप्त कर लेंगे.

सोयाबीन का तेल (Soyabean oil )

सोयाबीन का तेल भी बनता है और छोटे बड़े पैकिंग में बाजार में मिलता भी है. यह तेल स्वादिष्ट भी होता है और अन्य सभी खाद्य तेलों से ज्यादा पौष्टिक भी होता है. सोयाबीन का तेल मक्खन के गुणों की पूर्ति करता है. अन्य तेलों के मुकाबले सस्ता होते हुए भी सोयाबीन तेल ज़्यादा पौष्टिक होता है इसलिए रसोई में सोयाबीन का ही तेल उपयोग में लेना चाहिए.

सोया फ्राय (soya fry)

पानी में नमक व् खाने का सोडा डाल कर इसमें सोयाबीन डाल कर १२ घंटो तक रखें. फिर निकाल कर तेल में कुरकुरे होने तक तल लें. हल्का मसाला मिला लें. ये सोया फ्राय बहुत स्वादिष्ट और मज़ेदार लगते हैं. शुद्ध और प्राकृतिक खान-पान के रूप में इनका सेवन करें. यह स्वादिष्ट ही नहीं, सस्ते भी हैं इसलिए महंगा नमकीन न खाकर सस्ता और स्वादिष्ट सोया फ्राय खुद भी खाकर मेहमानों को भी खिलाइये. मेहमान भी चकित होकर पूछेंगे की, वाह, आखिर है क्या यह चीज!

सोया बॉयल्ड (soya boiled )

शाम को सोयाबीन पानी में डाल कर १२ घंटे के लिए रख दें. दूसरे दिन इन्हें कुकर में बफा लें या तपेली में उबाल कर पानी से सोयाबीन निकाल लें. ठंडा करके इसपर मसाले बुरकते हुए मिला लें, प्याज और हरा धनिया काट कर मिला लें . चाहें तो पालक, ककड़ी, गाजर, टमाटर जो भी उपलब्ध हो काटकर डाल दें . निम्बू निचोड़ दें, इलायची पीस कर डाल दें या इसे मीठा करना हो तो मसाले न डाल कर गुड़ मसल कर डाल दें. इसे खूब चबा चबा कर नाश्ते में खाएं. यह प्रयोग ज़्यादा नहीं तो ४०-४५ दिन ही नियम से कर लें फिर देखें की शरीर में कैसी चुस्ती, फुर्ती और ताकत आती है.

कमज़ोर शरीर वाले युवक-युवतियां प्रायः पूछा ही करते हैं , विशेषकर युवक ज़्यादा पूछते हैं की शरीर का दुबलापन कैसे दूर करें तो ऐसे सभी युवक-युवतियों को हम ये नेक सलाह देते हैं की वे डेढ़-दो माह, धैर्यपूर्वक रोज़ाना सोया बॉयल्ड को नाश्ते में खूब चबा चबा कर खाएं और देख लें की उनका शरीर कैसा सुडौल और शक्तिशाली बनता है. सोयाबीन में प्रोटीन इतनी ज्यादा मात्रा में होता है की इसे "प्रोटीन का राजा" कहा जाता है.प्रोटीन शरीर की वृद्धि, विकास और सुडौलता के लिए कितना ज़रूरी है यह सभी बुद्धिमान जानते हैं.

महिलाओं के लिए सोयाबीन विशेष रूप से लाभप्रद और उपयोगी है. गर्भवती और नव प्रसूता स्त्री को सोयाबीन से बने व्यंजन, सोयाबीन से बना दूध, दही आदि का सेवन कराना चाहिए. सोयाबीन का आटा, दूध, दही आदि के सेवन से गर्भवती का शरीर तो पुष्ट और बलवान बनता ही है साथ ही गर्भस्थ शिशु को भी पुष्टि प्राप्त होती है. जिन गर्भवती महिलाओं का शरीर व् स्वास्थ्य कमज़ोर हो उन्हें पूरे गर्भकाल में सोयाबीन के आटे की रोटी , सोयाबीन से बना दूध, दही तथा अन्य व्यंजनों का उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए. इससे उनके शरीर की कमज़ोरी दूर होगी, शरीर शक्तिशाली होगा और गर्भस्थ शिशु का भी शरीर मज़बूत होगा और वो एक स्वस्थ, सुडौल तथा निरोग शिशु को जन्म दे सकेगी.

इतना विवरण पढ़कर आप सोयाबीन की उपयोगिता, गुणवत्ता और लाभप्रद क्षमता को जान ही चुके होंगे. अब इस जानकारी का सदुपयोग तभी हो सकेगा जब आप सोयाबीन को अपने आहार में शामिल करेंगे और इसको सभी रूपों में घर पर स्वयं ही तैयार कर खाने लगेंगे.

 

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