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Nagkesar, नागकेसर

Nagkesar, नागकेसर

बाग़ बगीचों में एक वृक्ष होता है नागचम्पा जिसके जिसके फूल के पुंकेशर को नागकेशर या नागकेसर कहते हैं. इस पुंकेशर का उपयोग औषधि के रूप में, विभिन्न रोगों की चिकित्सा में किया जाता है. घरेलु इलाज के तौर पर प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों में नागकेसर भी बहुत उपयोगी सिद्ध होने वाला पुंकेसर है. फूल के बीच में जो बारीक़ बारीक़ केसरिया रंग का नरकेसर होता है उसे नागकेसर कहते हैं. यहाँ नागकेसर के गुण, कर्म तथा उपयोग के विषय में जानकारी प्रस्तुत की जा रही है.


नागकेसर के विभिन्न भाषाओँ में नाम ( name of Nagkesar in different languages ) :-
sanskrit - नागपुष्प
hindi - नागकेशर, नागकेसर
marathi - नागकेशर
gujarati - पीलू नागकेसर
bangla - नागेश्वर
telugu - नागचम्पकम
tamil - नानगू
kannada - नागकेसर
malyalam - नंगा
farsi - नारमुश्क
english - mesua
latin - mesua ferrea

परिचय (introduction of Nagkesar ) - नागकेसर एक छोटा और सूंदर पेड़ होता है जो सदा हरा भरा रहता है. यह साधारण और माध्यम ऊंचाई वाला प्लांट होता है. इसका तना चिकना, सीधा, छाल-रहित और राख के रंग का होता है. इसके फूल सफ़ेद रंग के, चार पंखड़ी वाले होते हैं, सुगन्धित होते हैं और वसंत ऋतू में आते हैं. इसे नागचम्पा भी कहते हैं. यह बाग़ बगीचों में पाया जाता है. इसकी पैदावार विशेषतः नेपाल, पूर्वोत्तर हिमाचल प्रदेश, दक्षिण भारत तथा अंडमान में ५००० फ़ीट की ऊंचाई पर की जाती है. नागकेशर जड़ी-बूटी बेचने वाली आयुर्वेदिक दवा दुकानों पर भी मिलता है.

नागकेसर के रासायनिक संघटक (chemical ingredients of nagkesar ) - कच्चे फल में एक तैलीय राल होता है जिससे एक पीताभ , सुगन्धित तेल प्राप्त होता है. बीज मज्जा से ६०-७०% रक्ताभ या गहरे भूरे रंग का गाढ़ा तेल प्राप्त होता है. फलावरण में कषाय दृव्य होता है. केशर में दो तिक्त पदार्थ तथा एक पीत रंजक दृव्य होते हैं. पुष्पों से एक रक्ताभ भूरे रंग का सुगन्धित तेल प्राप्त होता है. बीजों में लेक्टोन ( mesoul ) तथा फैलोनिक पदार्थ ( mesuone ) पाए जाते हैं जिनमे जन्तुघ्न शक्ति होती है.

नागकेसर के उपयोग (Ayurveda uses of nagkesar in hindi ) - नागकेसर का उपयोग विभिन्न बीमारियों को दूर करने वाले नुस्खों में किया जाता है. हाथ पैर की त्वचा में जलन, खुनी बवासीर में गुदा द्वार की जलन और कफयुक्त खांसी की चिकित्सा में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है. इसके बीजों के तेल का उपयोग गठिया रोग में मालिश के लिए किया जाता है. इसका लेप घाव भरने और दुर्गन्ध दूर करने में उपयोगी होता है. खुनी बवासीर में गिरने वाले खून को रोकने के लिए इसका उपयोग अत्यंत लाभकारी होता है. नागकेसर के कुछ घरेलु उपयोग नीचे प्रस्तुत हैं :-

खूनी बवासीर (treatment of piles with nagkesar in hindi ) - नागकेसर ५ ग्राम, मिश्री १० ग्राम और मक्खन १० ग्राम - तीनों को मिला कर एक जान कर लें. इसे सुबह ख़ाली पेट चाट लें. फिर दूसरे दिन इसी तरह सुबह के वक़्त इसका सेवन करें. ऐसे दो या तीन बार सेवन करने से ही खून गिरना बंद हो जाता है. यह नुस्खा परीक्षित (tested ) है.

पैरों की जलन (treatment of legs inflammation with Nagkeshar ) - नागकेशर का चूर्ण १० ग्राम लेकर पानी में मिलाकर लेप बना लें. इसे जहाँ जहाँ जलन होती है वहां लेप करें.
गठिया का दर्द (treatment of gathiya pain or joint pain with nagkesar ) - गठिया (सन्धिवात ) में जोड़ों में दर्द होता है. नागकेसर का तेल लगाकर हल्कीहलकी मालिश करने से दर्द दूर होता है.
सर्पदंश - जहाँ सांप ने काटा है वहां नागकेशर के पत्ते पीस कर रखें.
श्वेत प्रदर (treatment of leucorrhea with nagkesar ) - छाछ केसाथ, नागकेसर का चूर्ण सुबह शाम लें.
पुराना घाव (treatment of old wound with nagkesar in hindi ) - कभी कोई घाव ठीक नहीं होता, पुराना पड़ जाता है, दूर्गंघयुक्त पीप पड़ने लगती है. ऐसे बिगड़े हुए पुराने घाव पर नागकेसर का तेल लगाएं.

 

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