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कौंच की सम्पूर्ण जानकारी (All info on kaunch, kaunch Seeds , kaunch pak and all kaunch remedies )


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In Biovatica.Com we keep listing the details and introduction of certain plants, trees and foliages whose some parts are proven to be beneficial and useful in home use and has very effective qualities as a home remedy. “Kaunch" and “kaunch seeds” is regarded in ayurveda as one of the best natural ayurvedic home remedy for use in the problems related to sexual health.

Centuries ago, Ayurveda had told certain qualities, characteristics and nature of certain plants, trees and foliages ( jadi-bootis ) which are neither changed, altered nor spoiled even today. One such plant-foliage is ‘Kaunch' which is found in forests and tropical gardens all over the country. Here we are listing the detailed information about Kaunch, which, according to Ayurveda, is effectively proven in the problems/diseases related to sexual health, impotence and weakness/looseness of sexual organ ( dhwaj bhang ) etc.

Names of Kaunch in different languages :-

Sanskrit kapikachhu, कपिकच्छु
Hindi Kaunch, Kewanch| कौंच , केवाँच
Marathi Khajkuhili, Kuhili | खाजकुहिलि , कुहिलि
Gujarati Kauncha, Kawach | कौंचा , कवच
Bengali Alkushi , आलकुशी
Telugu Pilliadugu, पिल्लीअड्डुगु
Tamil Poonaikali, Punaik | पुनइकली, पुनइक
Kannada Nasukunni, नसुकुन्नी
Malyalam Naikurana, नइकुरना
Mumbai Kuhili, कुहिली
Punjabi Kovanch, कोवंच
English Cowhage
Latin Mucuna Prurita

कौंच के गुण (characteristics and qualities of kaunch ) - कौंच वीर्यवर्धक, मधुर, पुष्टिकारक, भारी, कड़वा, वातनाशक , स्निग्ध, उष्णवीर्य, बलदायक और कफ, पित्त तथा रुधिर विकार नाशक है और इसके बीज अत्यंत वाजीकारक हैं.

कौंच का परिचय (introduction of kaunch )

कौंच शिम्बी लता जाती की एक वनौषधि है जो किसी पेड़ के सहारे बढ़ती है. इसकी फलियों के ऊपर रोआं होता है जिसके स्पर्श से बहुत तेज खुजली चलती है. इसकी फली में ५-६ चमकीले, काले, अंडाकार और चपटे बीज होते हैं जिनकी गिरी सफ़ेद रंग की होती है. आयुर्वेद ने वाजीकारक और कामोत्तेजक जितनी औषधियों का वर्णन किया है उनमे वनस्पति वर्ग में सबसे श्रेष्ठ और मुख्य औषधि यह कौंच बीज ही है. कौंच बीज में उत्तेजक, स्तम्भक और धातुवर्धक तीनो ही गुण मौजूद हैं इसलिए लगभग सभी वाजीकारक और बलवीर्यवर्द्धक नुस्खों में कौंच बीज को शामिल किया जाता है. इसका प्रयोग बिना छिलके के, सिर्फ गिरी के रूप में ही किया जाता है. छिलका हटाने की एक विधि है जिसका विवरण इसी आर्टिकल में आगे दिया गया है. कौंच की लता वर्षा ऋतू में उत्पन्न होती है, शरद ऋतू में फूल लगते हैं व् शीतकाल में फल लगते हैं. रोएं हटाकर इसकी फलियों का शाक व् अचार बनाया जाता है. कौंच की फली दो प्रकार की होती है. जंगल में पैदा होने वाली कौंच को जंगली कौंच और बाग़-बगीचों में पैदा होने वाली कौंच को बागी कौंच कहते हैं. बाजार में पंसारियों और देसी जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर इसके बीज आसानी से मिल जाते हैं. कौंच सारे भारत में उष्ण स्थानों पर पैदा होती है. इसके बीज टॉनिक होते हैं. कौंच पाक और वानरी गुटिका नामक योग कौंच के बीज से बनने वाले प्रमुख योग हैं.

कौंच के उपयोग (uses of kaunch , kaunch seeds )

कौंच के बीजों को प्रयोग करने से पहले इन्हे शुद्ध किया जाता है. जितनी मात्रा (वज़न ) में बीज हों उनसे चौगुनी मात्रा में दूध लेकर , दूध में बीज डाल दें व् उबलने के लिए आग पर चढ़ा दें. जब दूध खूब उबलने लगे तब १-२ बीज निकाल कर देखें. यदि छिलका नरम और निकलने योग्य हो गया हो तो उतार कर ठंडा कर लें और मसल-मसल कर छिलके हटा दें. एक एक बीज की जांच कर लें की एक भी बीज में छिलका लगा न रह गया हो. सब छिलके इकट्ठे करके, दूध के साथ ऐसी जगह फेंक आएं जहाँ कोई पशु न खा सके या ज़मीन में गाड़ दें. यही विधि है कौंच के बीजों को शुद्ध करने की यानी छिलका अलग करने की. बीजों को छाया में सुखाकर कूट-पीस कर महीन चूर्ण बनाकर प्रयोग किया जाता है. कौंच बीज के चूर्ण को एक वर्ष के भीतर प्रयोग कर लेना चाहिए. एक वर्ष बाद इसकी गुणवत्ता कम होने लगती है. यौन-दौर्बल्य और विकार दूर करने के लिए यह वाजीकारक जड़ी-बूटियों में सर्वश्रेष्ठ है क्यूंकि यह यौनांग की शिथिलता व् नपुंसकता दूर करती है, शरीर में शुक्र धातु की पुष्टि व् वृद्धि करती है और स्तम्भन शक्ति बढ़ा कर शीघ्रपतन रोग को समाप्त करती है.

अब कौंच का प्रयोग कर बनने वाले कुछ आयुर्वेदिक योगों का पूर्ण विवरण प्रस्तुत है (Now we will list some ayurvedic remedies which are prepared using kaunch ) :-

१) वानरी गुटिका (vanari gutika )

कौंच बीज से बनाया जाने वाला वानरी गुटिका योग अद्भुत और अत्यंत वाजीकारक है. वानरी गुटिका को बनाने की विधि सरल है और इसे रसोईघर में व्यंजन की तरह तैयार किया जा सकता है.

वानरी गुटिका के घटक द्रव्य (ingredients of vaanari gutika ) - कौंच के छिलका रहित बीजों का चूर्ण , दूध और शुद्ध घी, मिश्री और शहद आवश्यक मात्रा में.
वानरी गुटिका निर्माण विधि (vanari gutika preparation method ) - बीजों के चूर्ण को दूध में गाढ़ा घोल लें. कढ़ाई में घी डालकर गर्म करें और मंद आंच रख कर इस घोल की छोटी-छोटी पकौड़ियाँ , मंदी आंच पर खूब पका कर, निकाल लें. मिश्री की चाशनी पहले से तैयार रखें और पकौड़ियाँ इस चाशनी में डालते जाएँ. जब पकौड़ियाँ खूब चाशनी पी लें तब एक बरनी में शहद भर कर ये पकौड़ियाँ इसमें डाल दें और बरनी का मुंह बाँध कर ४-५ दिन रखा रहने दें.
वानरी गुटिका मात्रा और सेवन विधि (vanari gutika quantity and dosage ) - लगभग २०-२५ ग्राम वज़न या अपनी पाचन शक्ति के अनुसार मात्रा में ये पकौड़ियाँ खूब चबा चबा कर खाना चाहिए. कम से कम ६० दिन तो सेवन करना ही चाहिए. मात्रा अपनी पाचन शक्ति के अनुसार रखना चाहिए.
वानरी गुटिका के लाभ (Advantages and health benefits of vanari gutika ) - वानरी गुटिका के प्रयोग से सभी प्रकार की यौन कमजोरियां दूर हो जाती हैं. यौनांग की शिथिलता, शीघ्रपतन और कामशीतलता जैसे विकार गायब हो जाते हैं. वानरी गुटिका यौनशक्ति प्राप्त करने वाला बहुत ही श्रेष्ठ गुणवत्ता वाला नुस्खा है.

२) वृद्ध दंड चूर्ण (vriddh dand churna )

वृद्धदंड चूर्ण प्रौढ़ और वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए विशेष स्फूर्तिदायक और शरीर की निर्बलता दूर करने वाला है. यह सामान्य शक्ति और स्फूर्ति देने वाला योग स्वस्थ अवस्था में भी सेवन योग्य है.
वृद्धदंड चूर्ण के घटक द्रव्य (ingredients of vriddhdand churna ) - कौंच बीज का चूर्ण, सफ़ेद मूसली, सेमल की जड़ की छल, आंवला, गिलोय सत्व, और मिश्री - सब १००-१०० ग्राम.
वृद्ध दंड चूर्ण निर्माण विधि (preparation method of vriddh dand churna ) - मिश्री अलग रख कर सभी द्रव्यों को खूब कूट पीस कर महीन चूर्ण कर परस्पर अच्छी तरह मिला लें फिर मिश्री पीस कर इस मिश्रण में मिला लें. इसे ढक्कन वाली शीशी में भर कर रखें.
मात्रा और सेवन विधि - १-१ चम्मच चूर्ण सुबह शाम मीठे दूध के साथ सेवन करें.
लाभ - यह शरीर को स्फूर्तिमय और सबल बनाये रखता है. धातुक्षीणता,स्वप्नदोष, वृद्धवस्थाजन्य कमजोरी, वातज प्रमेह, कमर व् पीठ दर्द आदि दूर करता है. इसे स्त्री पुरुष दोनों सेवन कर सकते हैं. वृद्ध दंड चूर्ण इसी नाम से बाज़ार में भी मिलता है.

३) कौंच पाक (Kaunch Pak )

कौंच का पाक भी बनाया जाता है जो वाजीकारक सभी पार्कों में श्रेष्ठ और अत्यंत लाभकारी है. नवविवाहित यदि किसी प्रकार की दुर्बलता का अनुभव करें तो यह पाक बनाकर २-३ माह तक नियमित रूप से सेवन करें.
कौंच पाक के घटक द्रव्य (ingredients of Kaunch Pak ) - कौंच बीज की गिरी १ किलो , दूध ५ लीटर , गोघृत आवश्यकता के अनुसार मात्रा में, मिश्री या शक्कर दो किलो तथा जायफल , जावित्री, कंकोल, सौंठ, पीपल, काली मिर्च, लौंग, अजवाइन , अकरकरा, समुद्रशोथ, दालचीनी, नागकेसर, तेजपान, छोटी इलायची, सफ़ेद जीरा, गजपीपल और प्रियंगु के फूल - सभी १७ द्रव्य १०-१० ग्राम पइसे हुए चूर्ण के रूप में.
कौंच पाक निर्माण विधि (Kaunch Pak preparation method ) - कौंच बीज के चूर्ण को दूध में डालकर पकाएं और मावा बनाकर उतार लें. कढ़ाई में घी डालकर गर्म करें और इसमें मावा डालकर अच्छी तरह भून लें. मिश्री या शक्कर की चाशनी बनाकर भुना हुआ मावा डालकर खूब मिला लें और सभी १७ द्रव्यों का चूर्ण, मावा ठंडा होने से पहले मिलाकर , थाली में घी का हाथ लगाकर इसे फैला कर डाल दें. जम जाए तब २० ग्राम वज़न की बर्फियाँ काट लें.

कौंच पाक मात्रा और सेवन विधि (Kaunch Pak quantity and dosage ) - एक बर्फी सुबह खली पेट और एक बर्फी रात को सोने से पहले मीठे दूध के साथ खूब चबा चबा कर खाएं.

कौंच पाक के लाभ (Advantages and health benefits of Kaunch Pak ) - कौंच पाक योग सिर्फ एक श्रेष्ठ वाजीकारक योग ही नहीं है जो धातुक्षीणता, शीघ्रपतन , ध्वजभंग आदि यौन विकारों को दूर करता है बल्कि प्रमेह, दुर्बलता, नेत्र ज्योति की कमज़ोरी, थकावट, सुस्ती चेहरे की निस्तेजता आदि बीमारियां भी दूर करता है. स्त्रियों के शरीर को भी पुष्ट, सुडौल और गर्भधारण करने यपग्य बनता है. आयुर्वेद के अनुसार कौंच पाक नर-नारी दोनों के लिए सामान रूप से लाभ करने वाला, तथा दीपक, पाचक और पौरुष बल बढ़ने वाला ऐसा उत्तम योग है जिसको सेवन करने से निश्चित रूप से लाभ होता ही है बशर्ते पाचनशक्ति कमज़ोर न हो और कब्ज़ भी न रहता हो. कौंच पाक का सेवन अवश्य करना चाहिए.

 

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