ayurveda
Biovatica.Com

Welcome to Biovatica.Com

All About Ayurveda, Ayurveda Herbs and Indian Ayurveda Home Remedies

Search for Ailment, Condition, Disease or Natural Ayurvedic Indian Home Remedies :-

Ayurveda on Men's Health
Ayurveda on Youth & Teen
Ayurveda on youth and teen
Ayurveda on Women's Health
ayurveda women health
About US Contact Us Donate
Men's Health Women's Health Sexual Health
Anti-Aging Digestive Health Skin Care


Biovatica Home

Ayurveda

Tridosha

Vajikarana

Disease List

Acne

Adenoids

Addiction

Alopecia

Anemia

Anxiety

Allergic Rhinitis

Alzheimers

Arthritis

Asthma

Asthma Dama in Hindi

Blood Pressure

Breast Lump

Bronchial Asthma

Bronchitis

Cancer Ayurveda

Cataract

Conjunctivitis

Colitis

Constipation

Cough

Common cold (Coryza)

Cramps

Deafness

Diarrhoea

Diabetes mellitus

Diabetes Ayurveda

Depression

Dysmenorrhoea

Eczema

Enuresis (Bed Wetting)

Epilepsy

Epistaxis

Earache

Eructation and Flatulence (Gas Trouble)

Fatigue

Fever

Gallstones

Glands

Gout

Heart Disease and Cholesterol

Herpes

Hemorrhoids (Piles)

Headache

Heartburn

Heatstroke

Hernia

Hysteria

Hysteria versus Epilepsy

Hepatitis ayurveda in hindi

Hypertension

Impotence

Insomnia

Jaundice

Leucorrhoea

Lumbago

Lungs

Kshay Rog (TB)

Madhumeh

Menopause

Metrorrhagia

Migraine

Morning Sickness

Motion Sickness

Nausea

Obesity

Oedema

palpitation

Joint Pain

Parkinson's disease

Paralysis

Psoriasis

Rheumatoid Arthritis

Spondylitis (Ankylosing)

Sciatica

Sinusitis

Sore Throat

Sprain

Stiff Neck

Tennis Elbow

Tobacco Addiction

Gonorrhea

Syphilis

Schizophrenia

Stress

Syncope

Teeth

Thyroid

Thyroid Disorders

Tinnitus

Tonsillitis

Toothache

Trigeminal Neuralgia

Ulcers

Urinary Incontinence

Vertigo

Vertigo Acupressure

Vomiting

Writer's Cramp

Men's Health

Erectile Dysfunction(ED)

Premature Ejaculation (PE)

Nocturnal Emission (Wet Dreams)

Masturbation

Reproductive Health

Low Sperm Count

Brahmacharya

Low sex drive Libido) in male

Hair Loss (Male Baldness)

Women's Health

Pregnancy

Periods

Breast Care

Low Sex Drive (Libido) in Women

Hair Loss (Female Baldness)

Ayurvedic Herbs, Vati and Home Remedies List

1) Divya Rasayan Vati

2) Kali Mirch (Black Pepper)

3) Brahmi

4) Amla (Aanvla)

5) Sarpagandha

6) Kesar

7) Isabgol

8) kaunch

9) Ashwagandha

10) Ashoka Tree and Ashokarishta

11) Sada Suhagan Plant

12) Shatavari

13) Soybean Ayurveda

14) Nagkesar

15) Gandhak Rasayan

16) Laung

17) Eladi vati

18) Suvarna Malini Vasant

18) Kumar Kalyan Ras

20) Dashang Lep

21) Jamun

22) Bhringraj

23) Bhringrajasava

24) Maha Triphaladi Ghrit

25) Kanakasava

26) Kela

27) Ashwa Kanchuki Ras

28) Prameha Gaj Kesari Vati

29) Dhaniya

30) Kaalmegh

31) jaayfal

32) Ambar Kasturyadi Vati

33) Vidaryadi Churna

34) Vasavaleha

35) Makkhan

Miscellaneous

Sexual Health

Anti-Aging

Skin Care

Digestive Health

Acupressure

Ayurveda Resources

Archives

Ayurvedic Oils

Ayurveda and Mental Health

Ayurveda and Summer Season

Ayurveda and Winter Season

Ayurveda and Rainy Season

Ayurveda Recipes

Ayurveda Yoga

Ayurveda Paks

Ayurveda Home Remedies

Ayurvedic Solutions

Ayurveda Images

Ayurveda Child Care

Privacy Policy

Site Map

Contact Us

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


शतावरी, Shatavari
shatavari shatavari




शतावरी, Shatavari


हमारे देश में नाना प्रकार की जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां उपलब्ध हैं और प्रत्येक वनस्पति किसी न किसी हेतु के लिए उपयोगी होती है. biovatica .com में वनस्पतियों के गुण और उपयोग का विवरण, परिचय सहित प्रकाशित किया जाता है. इस आर्टिकल में औषधीय गुणों से भरपूर शतावरी के बारे में विवरण प्रस्तुत है. यहाँ शतावरी के गुण, उपयोग, प्रभाव और घरेलु इलाज में किये जाने वाले इसके प्रयोगों की जानकारी प्रस्तुत की जा रही है.

first we will list what shatavari is called in different languages :


संस्कृत(sanskrit ) - शतावरी
हिंदी(hindi ) - शतावर
मराठी (marathi )- सतावरी
गुजराती (gujarati )- सेमुख
बंगला(bangla ) - शतमूली
तेलुगु(telugu ) - एट्टुमत्ति टेंड
तमिल (tamil )- सदावरी
फ़ारसी(farsi ) - शकाकुल
इंग्लिश(english ) - Ares Moses
लैटिन (latin ) - Asparagus racemosus

शतावरी के गुण ( characteristics and qualities of shatavari ) - शतावरी भारी, शीतल, कड़वी, स्वादिष्ट, रसायन, मधुर रस युक्त, बुद्धिवर्धक, अग्निवर्धक, पौष्टिक, स्निग्ध, नेत्रों के लिए हितकारी, गुल्म व् अतिसार नाशक, स्तनों में दूध बढ़ाने वाली, बलवर्धक तथा वात, पित्त शोथ और विकार को नष्ट करने वाली है. यह छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती है. बड़ी महाशतावरी कहलाती है. दोनों के गुण लगभग एक समान हैं. महाशतावरी में शीतवीर्य , गृहणी व् अर्श रोग नाशक, नेत्र रोग नाशक, मेधा व् ह्रदय के लिए हितकारी, वृष्य तथा रसायन के गुण भी होते हैं.

मात्रा और सेवन विधि (quantity and dosage of shatavari ) - इसकी मात्रा ५ से १० ग्राम चूर्ण है. इसे सुबह और रात को सोते समय कुनकुने गर्म मीठे दूध के साथ सेवन करना चाहिए.

आयुर्वेद में दस प्रमुख जड़ी-बूटियों में से एक है शतावरी जो अपने विभिन्न गुणों व् प्रभाव के कारण एक श्रेष्ठ व् महत्वपूर्ण जड़ी मानी जाती है. इसे शतावर और सतावर भी कहते हैं. यह रसोन-कुल ( लिलिएसी - liliaceae ) की वनस्पति है. इसकी दो और जातियां पायी जाती है. एक बड़ी लता वाली होती है जिसमे लंबे कंद बड़ी संख्या में होते हैं. इसे महाशतावरी, सहस्त्रावीर्या और सहस्रामूल कहते हैं. और लैटिन भाषा में A . Sermentosa linn . कहते हैं. दूसरी कंटक रहित जाती होती है जो हिमालय पर्वत पर ४ से ९ हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर मिलती है. हम जिस शतावरी की बात कर रहे हैं उसे लैटिन भाषा में Asparagus resmosus कहते हैं और यह सारे भारत में और हिमालय पर्वत में पैदा होती है. यह देश भर में आयुर्वेदिक दवाइयों की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध होती है. यूनानी मत के अनुसार यह थोड़ी मधुर, कामोत्तेजक, यौनशक्ति वर्धक , सार्क, कफ निकालने वाली, स्तनों में दूध बढ़ाने वाली, पौष्टिक तथा किडनी विकार, लिवर विकार, मूत्रदाह, सुजाक रोग के कारण मूत्रनली में जलन, तथा सुजाक रोग आदि बिमारियों को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है.

शतावरी के उपयोग (uses of shatavari ) - आयुर्वेदिक ग्रन्थ चरक, सुश्रुत, भावप्रकाश आदि ग्रंथों में शतावरी की भारी प्रशंसा की गयी है और वैद्यों की यह परमप्रिय और विश्वसनीय जड़ी-बूटी है. शतावरी का उपयोग वात संस्थान (nervous system ) और मस्तिष्क (brain ) को बलवान बनाने , धातुओं को पुष्ट करने तथा पित्त प्रकोप का शमन करने में बहुत गुणकारी तथा प्रभावशाली सिद्ध होता है. मधुर, स्निग्ध और भारी गुण वाली होने से शतावरी पित्त का शमन करती है, शतावरी वात, पित्त और कफ तीनों दोषों पर अच्छा प्रभाव करती है. शतावरी चूँकि मधुर रस प्रधान है अतः इसके सेवन से त्रिदोष, रस रक्त आदि सप्त धातु तथा शरीर के अंगों को भरपूर बल प्राप्त होता है. चरक संहिता में शतावरी की गणना , बलदायक एवं आयुवर्धक महाकषायों में की गयी है. इसके सेवन से वात और वातनाडियों की कमज़ोरी दूर होती है और वे सबल बनती हैं जिससे सभी वात रोग शांत हो जाते हैं. शतावरी शीतल और मूत्रजनन गुण वाली होती है जिससे इसका सेवन करने से रोगी को खुल कर पेशाब होता है और कई मूत्र विकार नष्ट हो जाते हैं. शतावरी महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है. यह सब प्रकार के प्रदर रोगों को दूर करती है और मासिक धर्म को नियमित करती है. इसके सेवन से स्त्रियों के शरीर को बलपुष्टि प्राप्त होती है, प्रसूता के स्तनों में दूध आने लगता है और दूध की मात्रा बढ़ती है. घरेलु नुस्खों में पौष्टिकता तथा शक्ति का गुण बढ़ाने के लिए , घटक द्रव्यों में , शतावरी को भी शामिल किया जाता है. अनेक आयुर्वेदिक योगों में शतावरी का उपयोग किया जाता है. शतावरी चूर्ण बना बनाया बाजार में मिलता है. शतावरी से युक्त आयुर्वेदिक योगों में शतावरी घृत (shatavari ghrit ), नारायण तेल, विष्णु तेल, शतमूल्यादि लौह, शतावरी गुग्गुल (shatavari guggul ), शतावरी चूर्ण (shatavari powder ), शतावरी साधित तेल (shatavari sadhit oil ), शतावरी मोदक और शत्वार्यादि चूर्ण आदि के नाम उल्लेखनीय हैं. शतावरी चूर्ण यौन दौर्बल्य दूर करने में सफल सिद्ध हुआ है. शतावरी साधित तेल का उपयोग 'नाव मॉस चिकित्सा ' के अन्तर्गत गर्भवती द्वारा नौवें मॉस में किया जाता है. शतावरी के उपयोग के विषय में इतनी चर्चा करने के बाद अब घरेलु इलाज़ में प्रयोग किये जाने वाले शतावरी के कुछ सफल सिद्ध घरेलु नुस्खे प्रस्तुत कर रहे हैं.

 

स्तनों में दूध वृद्धि (use of shatavari in increasing breast milk ) - प्रसव के बाद कुछ नवप्रसूता माता के स्तनों में पर्याप्त दूध नहीं उतरता. इस व्याधि को दूर कर स्तनों में दूध की वृद्धि करने के लिए शतावरी का प्रयोग श्रेष्ठ सिद्ध हुआ है. सुबह शाम १ गिलास दूध के साथ १-१ चम्मच शतावरी चूर्ण नियमित रूप से फांक कर लेने से स्तनों में दूध उतरने लगता है.
दूसरी विधि - शतावरी २० ग्राम लेकर मोटा मोटा जौकुट कूट लें. एक गिलास दूध व् एक गिलास पानी मिला कर यह जौकुट किया हुआ शतावरी २० ग्राम डाल कर उबालें. जब एक गिलास शेष बचे तब उतार कर छन्नी से छान लें और इसमें चाहें तो स्वाद के अनुसार पिसी मिश्री या शक्कर घोल कर माता को सुबह शाम (ताज़ा तैयार करके)पिलाएं . इस प्रयोग से स्तनों में दूध तो आने ही लगेगा, नवप्रसूता माँ के शरीर में प्रसव के कारण आई निर्बलता भी दूर होगी. प्रसूता स्त्रियों के लिए शक्ति देने और दूध बढ़ने वाला यह शतावरी का श्रेष्ठ प्रयोग है.

अम्लपित्त ( treatment of hyperacidity with shatavari in hindi ) - आजकल अम्लपित्त के रोगी खूब बढ़ रहे हैं. शतावरी का यह प्रयोग अम्लपित्त का शमन करने के साथ रक्त पित्त, वात पित्त, पित्त प्रकोप, प्यास लगना, चक्कर आना और घबराहट आदि रोगों को दूर करने में सफल सिद्ध हुआ है. इन बिमारियों को दूर करने के लिए शतावरी घृत(shatavari ghrit ) सुबह शाम एक एक चम्मच थोड़ी सी शक्कर मिला कर लेना चाहिए.

स्वर भंग - गला बैठ जाने को स्वरभंग कहते हैं. इसके लिए शतावरी का चूर्ण एक चम्मच और कुलिंजन आधा चम्मच सुबह शाम सेवन करने से कफ प्रकोप के कारण बैठा हुआ गला (स्वरभंग) ठीक हो जाता है.

अपस्मार - शतावरी का रास एक एक बड़ा चम्मच सुबह शाम दूध में दाल कर पीने से सब प्रकार के प्रमेह नष्ट हो जाते हैं. रोगी को सुबह शाम, अपने बल के अनुकूल समय तक टहलना चाहिए.

रक्तमेह - शतावरी और गोखरू - १०-१० ग्राम एक कप पानी व् एक कप दूध मिलाकर , इसमें दोनों चूर्ण डाल कर उबालें. जब आधा कप बचे तब उतार कर ठंडा कर लें. यह काढ़ा सुबह शाम ताज़ा बनाकर पीने से मूत्र के साथ रक्त आना बंद होता है.

मूत्र में रुकावट (interruption in urinating ) - शतावरी के आधा कप काढ़े में १-१ चम्मच मिश्री व् शहद घोल कर रोज़ सुबह पिने से पेशाब की रुकावट दूर होती है. शतावरी के रस में समभाग दूध मिलकर पीने से भी पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है और मूत्र खुल कर होने लगता है.

पथरी - इसे अश्मरी भी कहते हैं. मूत्र के साथ बहुत बारीक़ कण या रेती निकले तो शतावरी के रस को समभाग दूध मिला कर पीने से या शतावरी की जड़ का महीन पिसा चूर्ण पानी या दूध के साथ पीने से १-२ महीने में पथरी गाल कर निकल जाती है. पथरी बनना बंद हो जाती है. रोग पुराना हो चूका हो तो ४-५ महीने तक नियमित सेवन करना चाहिए.

शतावरी घृत (shatavari ghrita or shatavari ghrit )

शतावरी को, प्रमुख घटक द्रव्य के रूप में लेकर, अन्य गुणकारी औषधियों के साथ एक उत्तम बलपुष्टिदायक योग बनाया जाता है जिसका नाम है शतावरी घृत. यह घृत रसायन गुण युक्त है और स्त्री-पुरुष दोनों के लिए सेवन योग्य है. यहाँ इस ग्रिट का पूर्ण परिचय और विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है :-
सामग्री (ingredients of shatavari ghrita ) - शतावरी का रस या काढ़ा ५०० मिली , गो दुग्ध ५०० मिली, गोघृत २५० मिली और जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली, क्षीर काकोली, मुनक्का, मुलहठी , मुद्गपर्णी, माषपर्णी , विदारीकंद और लाल चन्दन - सब १२ द्रव्य ५-५ ग्राम, पानी - ५०० मिली.
निर्माण विधि (preparation method of shatavari ghrita ) - जीवक, ऋषभक आदि १२ द्रव्यों का कल्क बना लें फिर शतावरी का काढ़ा , दूध, गोघृत व् कल्क मिला कर घृत पाक सिद्ध करें. जब घृत सिद्ध हो जाये तब छान कर ठंडा कर लें. इसे सेवन करते समय एक चम्मच घृत में एक चुटकी पिसी मिश्री या शक्कर और ३-४ बूँद शहद मिला कर सुबह शाम ठन्डे मीठे दूध के साथ सेवन करें.
उपयोग (advantages and health benefits of shatavari ghrita ) - यह घृत उत्तम, पौष्टिक, शीतवीर्य और वाजीकारक यानी यौनशक्तिवर्धक औषधि है. रक्त पित्त, वात रक्त, अंग में दाह, ज्वर , पित्त प्रकोप योनि शूल, पित्त जन्य पेशाब में रुकावट आदि रोगों को ठीक करने में यह घृत सफल सिद्ध हुआ है. शुक्राणुओं की कमी(oligospermia ) दूर कर यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ता है.बल, वीर्य, अग्नि तथा वर्ण की वृद्धि करता है और शरीर को पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली बनाता है. यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक दवा दुकानों पर मिलता है.

Now we will list some useful home remedies which are prepared with Shatavari :

शतावरी एक बहुत ही पौष्टिक, बलपुष्टिदायक और यौन दौर्बल्य नाशक जड़ी बूटी है. शतावरी को प्रयोग कर अन्य द्रव्यों के साथ बनाये गए कुछ सफल सिद्ध नुस्खे यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं. विवाहित स्त्री-पुरुष किसी भी एक नुस्खे को, अपनी आवश्यकता के अनुसार चुन कर सेवन कर सकते हैं.
बलपुष्टि (shatavari home remedy for physical strength and power in hindi ) - शरीर को बलिष्ठ, सुडौल और निरोग बनाने के लिए पति-पत्नी दोनों के सेवन योग्य नुस्खा इस प्रकार है - शतावरी, गोरखमुंडी, गिलोय, शालपर्णी और काली मूसली - पांचों १००-१०० ग्राम और मिश्री ३०० ग्राम मिलाकर कूट पीस कर खूब महीन चूर्ण करके एयरटाइट ढक्कन वाली बोतल में रखें. सुबह शाम १-१ चम्मच चूर्ण, थोड़ा सा घी मिलाकर गर्म दूध के साथ सेवन करें.

वाजीकारक (a vajikarak , vajikarna home remedy with shatavari in hindi ) - शतावरी का काढ़ा १ लीटर और दूध १ लीटर मिला कर इसमें १०० ग्राम घी डाल दें फिर विधिवत सिद्ध करें फिर ठंडा करके इसमें ५० ग्राम शहद और १०० ग्राम पिसी हुई शक्कर डाल कर अच्छी तरह मिला लें. यह मिश्रण एक चम्मच और आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण मिला कर सुबह शाम सेवन करें. यह यौन दौर्बल्य और शिथिलता दूर कर यौन शक्ति और कठोरता प्रदान करने वाला अच्छा गुणकारी वाजीकारक योग है.

नपुंसकता (shatavari ayurveda home remedy for erectile dysfunction and impotence using shatavari in hindi ) - शतावरी, सफ़ेद मूसली, कौंच के शुद्ध बीज, असगंध और गोखरू - सब १००-१०० ग्राम लेकर कूट पीस कर खूब महीन चूर्ण कर सबको मिला कर तीन बार छान लें. इस चूर्ण को १-१ चम्मच सुबह शाम गर्म दूध के साथ सेवन करें. यह योग नपुंसकता (impotence , erectile dysfunction ) दूर करने में सफल सिद्ध हुआ है.

स्वप्नदोष (shatavari ayurveda home remedy for nocturnal emission , wet dreams in hindi ) - शतावरी १०० ग्राम खूब बारीक़ महीन चूर्ण करें और मिश्री ५० ग्राम पीस कर मिला लें. एक गिलास दूध में घी एक चम्मच डाल कर घोल लें. इस दूध के साथ चूर्ण एक एक चम्मच सुबह शाम सेवन करें. यह योग स्वप्नदोष (wet dreams ) दूर करने में सफल सिद्ध होता है.


Please Feel Free to Ask any Queries or Share your Comments/Opinions Below :-

 
***

 

Biovatica.com

 

 

 

 

 

*Important Note/ Privacy Policy and Disclaimer : - *Authors of this website are neither licensed physicians nor scientists. *Statements on this websites have not been evaluated by the Food and Drug Administration or any other government agency of any country. *This website is for informational purpose only and is not meant to substitute for medical advice provided by your physician or other medical professional. *Informations or statements written in this website should not be used to diagnose or treat a health problem or disease, or for prescribing any medication. *If you suspect you have a medical problem, you should contact your own doctor or health care provider. *This website neither claim cure from any disease by any means NOR it sell any product directly . All products and Advertising Links are External. Any product Advertiesed in this website may not be intended to diagnose, treat, cure or prevent any disease. Though We make sure to put advertisements of only trusted companies, you are advised to verify claims before purchasing.

We Have certain Privacy Policy for our website visitors. For more details Kindly visit our Privacy Page by Clicking Here