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Biovatica.Com receives hundreds of emails everyday in which our website visitors ask several health related questions. In this section of the website, we answer these questions. If your queries are not already listed here, you can send your question through ‘contact us' button listed on the right bottom side of any page of the website. Please do not ask same questions repeatedly. Thank you.

प्रश्न - क्या आयुर्वेद में paralysis का कोई इलाज है. अगर है तो वो क्या है ?

उत्तर - आयुर्वेद में paralysis को पक्षाघात कहा जाता है. सामान्य हिंदी में इसे लकवा कहा जाता है. शरीर के जिस अंग पर इस रोग का प्रभाव होता है वह अंग शिथिल और नाकाम हो जाता है. यह एक कठिन साध्य रोग है जो विशेष परिस्थितियों में असाध्य भी हो जाता है.
पक्षाघात का आयुर्वेदिक उपचार - रसराज रस ५ ग्राम, एकांगवीर रस, ताप्यादि लौह,गिलोय सत्व और अभ्रक भस्म १०-१० ग्राम तथा प्रवाल पिष्ठि ५ ग्राम. सबको मिला कर ४० पुड़िया बना लें और १-१ पुड़िया सुबह-शाम शहद में मिला कर लें. इसके एक घंटे बाद महायोगराज गुग्गुल स्वर्णयुक्त और पंचामृत लौह गुग्गुल की १-१ गोली दूध के साथ लें. दोनों वक़्त भोजन के बाद आधा कप पानी में अश्वगंधारिष्ट , दशमूलारिष्ट और महाराष्ट्रादि काढ़ा २-२ चम्मच डाल कर पियें. मालिश के लिए महानारायण तेल, प्रसारिणी तेल, महामाष तेल, महविश गर्भ तेल और माल कांगनी तेल - पाँचों ५०-५० ग्राम लेकर एक बड़ी बोतल में डाल कर मिला लें. पक्षाघात से प्रभावित अंग पर यह तेल सुबह शाम लगा कर मालिश करें. रात तो सोते समय एरंड पाक एक चम्मच , गर्म पानी के साथ लें.

 

प्रश्न - संधिवात (sandhivata ) के लक्षण और कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताईये ?

उत्तर - जोड़ों में दर्द होना, चुभन होना, सूजन होना और अकडन होना संधिवात के लक्षण हैं. यह वात प्रकोप और अपच के कारण उत्पन्न होने वाला रोग है .

आयुर्वेदिक उपचार - वात गजांकुश रस और गिलोय सत्व १०-१० ग्राम, अभ्रक भस्म शतपुटी और प्रवाल पिष्टी ५-५ ग्राम, अजमोदादि चूर्ण ५० ग्राम. सब मिला कर ३० पुड़िया बना लें और १-१ पुड़िया सुबह शाम शहद के साथ लें. इसके एक घंटे बाद त्रयोदशांग गुग्गुल व् पंचामृत लौह गुग्गुल २-२ गोली दूध के साथ लें. भोजन के बाद महास्त्रादि काढ़ा व् दशमूलारिष्ट २-२ चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पियें.रात को सोने से पहले एक चम्मच स्वादिष्ट विरेचक चूर्ण गर्म पानी के साथ लें.

प्रश्न - नपुंसकता (इरेक्टाइल डिसफंक्शन ) के लिए कुछ आयुर्वेदिक औषधियां बताइये ?

उत्तर - नपुंसकता के बारे में हमारे पास बहुत से इमेल्स आते हैं इसलिए इस विषय पर विस्तृत वर्णन हमने इस पेज पर दिया है - http://www.biovatica.com/erectile_dysfunction.htm

फिर भी यहाँ कुछ उपचार प्रस्तुत कर रहे हैं - काम चूड़ामणि रस, वीर्यशोधन वटी- १-१ गोली और दिव्य रसायन चूर्ण १ चम्मच सुबह शाम दूध के साथ ९० दिन तक सेवन करें. भोजन के बाद अश्वगंधारिष्ट और भृंगराजासाव २-२ चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पियें. वाजीकरण तिला को शिश्नमुंड छोड़ कर शेष भाग पर लगा कर हलके हाथ से प्रतिदिन मालिश करें. कब्ज़ होने पर एक चम्मच कब्जीना चूर्ण सोते समय गर्म पानी के साथ लें.

प्रश्न - स्तम्भनशक्ति के लिए उपाय व् आयुर्वेदिक औषधियां कौन सी हैं ?

उत्तर - स्तम्भनशक्ति के विषय में भी हम बहुत विस्तार से अन्य आर्टिकल में बता चुके हैं . आप उस आर्टिकल में लिखे नुस्खों से इस समस्या से निजात पा सकते हैं. आर्टिकल की लिंक ये है - http://www.biovatica.com/premature_ejaculation.हतमhtm

फिर भी rivision के हिसाब से यहाँ भी कुछ औषधियां प्रस्तुत हैं - चंद्रोदय वटी, वीर्यस्तंभन वटी और वीर्यशोधन वटी १-१ गोली सुबह शाम दूध से लें. इसके एक घंटे बाद कौंच पाक १०-१० ग्राम खूब चबा चबा कर खाएं.

 

प्रश्न - मधुमेहजन्य नपुंसकता (erectile dysfunction due to diabetes ) के कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
उत्तर - मधुमेह (diabetes ) का मरीज भी यौन शक्ति की कमी का अनुभव करने लगता है. ऐसे रोगी को निम्नलिखित चिकित्सा करने से लाभ होता है :-
चिकित्सा - वसंत कुसुमाकर रस विशेष और प्रमेह गजकेसरी १-१ गोली सुबह शाम दूध के साथ लें. मधुमेहन चूर्ण या मधुहारी (शिवायु) एक चम्मच , भोजन से आधा घंटे पहले आधा कप पानी के साथ लें. भोजन के बाद आरोग्यवर्धिनी वटी विशेष नंबर १ दोनों वक़्त २-२ गोली पानी के साथ लें.

प्रश्न - क्या आयुर्वेद में शरीर का दुबलापन दूर करने के लिए कोई चिकित्सा है?

उत्तर - बहुत से युवक-युवतियां शरीर की दुर्बलता, दुबलापन, थकावट, कमज़ोरी,पिचके गाल, धंसी आँखें आदि की स्थिति ठीक कर शरीर को मोटा ताज़ा व् सुडौल बनाने का इलाज पूछा करते हैं सो प्रस्तुत है -
चिकित्सा - सुवर्णमालीनी वसंत, शिलाजत्वादि वटी एक-एक गोली और दिव्य रसायन चूर्ण एक चम्मच -सुबह शाम दूध के साथ लें. भोजन के बाद दृशयोविन या द्राक्षासव तथा अश्वगंधारिष्ट २-२ चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पियें.

Question - उच्च रक्तचाप (high blood pressure ) के लक्षण और कुछ आयुर्वेदिक इलाज बताइये ?

Answer - उच्च रक्तचाप यानि हाई ब्लड प्रेशर होने से सिरदर्द या भारीपन, अनिद्रा, चक्कर आना आदि शिकायतें होती हैं.
high blood pressure की आयुर्वेदिक चिकित्सा - ताप्यादिलोह , जहरमोर ख. पि. , शिलाजत्वादि वटी, गिलोय सत्व १०-१० ग्राम, प्रवाल पिष्टी ५ ग्राम मिला कर ४० पुड़िया बना लें.सुबह शाम १-१ पुड़िया शहद के साथ लें. इसी के साथ चंद्रप्रभा वटी २ गोली और सर्पगंधा घनवटी १ गोली दूध के साथ लें. भोजन के बाद आधा कप पानी में अर्जुनारिष्ट और चन्दनासव २-२ चम्मच दाल कर पियें.

Question - वीर्य में शुक्राणुअल्पता (low sperm count ) आयुर्वेदिक इलाज बताइये ?

Answer - ये प्रश्न लगातार बहुत से इमेल्स में पूछा जाता रहा है अतः हमने इसपर एक seperate आर्टिकल में विस्तार से आयुर्वेदिक उपचार बताये हैं. उस आर्टिकल की लिंक ये है --> http://biovatica.com/low_sperm_count.htm

शुक्राणुअल्पता की चिकित्सा - शुक्रमातृका वटी, वीर्यशोधन वटी एडीजुआ टेबलेट १-१ गोली और गोक्षुरादि चूर्ण १ चम्मच सुबह शाम दूध के साथ लें. भोजन के बाद अश्वगंधारिष्ट व् दशमूलारिष्ट २-२ चम्मच आधा कप पानी में दाल कर पियें. कम से कम ६ माह तक सेवन करें.

Question - अपनी प्रकृति उष्ण है या शीत, यह कैसे मालूम करें?

Answer - यदि गर्मी, गर्म पदार्थों के सेवन और गर्म आहार विहार करने में असुविधा या असहनीय उष्णता हो और शीत, शीतल पदार्थों के सेवन व् आहार विहार से असुविधा या असह्यता न हो तो प्रकृति उष्ण यानी तासीर गर्म समझना चाहिए. इसके विपरीत हो तो शीतल समझें.

 

Question - मुझे लगता है मुझे मानसिक नपुंसकता हो गयी है ? क्या मेरी इस स्थिति का कोई आयुर्वेदिक इलाज है ?

Answer - इस समस्या से सम्बंधित कई इमेल्स हमें प्राप्त होते हैं. इस समस्या के निराकरण के लिए निम्नलिखित चिकित्सा को ४-५ माह तक धैर्यपूर्वक करने से पूर्ण स्वास्थ्यलाभ हो जाता है.
चिकित्सा - कामचूड़ामणि रास, विगोजेम टेबलेट तथा दिव्यरसायन वटी की १-१ गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें. इसके साथ ही १ चम्मच कौंचपाक का भी दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें.

Question - मानसिक तनाव व् अन्य मानसिक विकारों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा या औषधि बताइये?

Answer - मनुष्य का शरीर मन-प्रधान, मनो-रासायनिक (psycho -chemical ) यंत्र की तरह है. ऊपर मन है जिसके प्रभाव से शरीर में रासायनिक क्रियाएं प्रतिक्रियाएं संचालित होती हैं अतः मन-मस्तिष्क की ज़रा सी भी असामान्य प्रवृत्ति को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. मस्तिष्क के किसी भी विकार जैसे मानसिक असंतुलन, कमज़ोरी, उन्माद, चिंता, अवसाद आदि के लक्षणों में निम्नलिखित चिकित्सा लाभ करती है.
चिकित्सा - शंखपुष्पी टेबलेट २ गोली, उन्माद गजकेसरी रस १ गोली - सुबह शाम दूध के साथ अथवा पानी के साथ सेवन करें.
दोनों वक़्त भोजन के उपरान्त अश्वगंधारिष्ट और सारस्वतारिष्ट की ४-४ चम्मच आधा कप पानी में मिला कर लें.

Question - अनिद्रा (insomnia ) के लिए आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - नींद न आना मानसिक विकार का प्रमुख लक्षण होता है. जब सभी इन्द्रियां और मन शांत होते हैं तब मनुष्य को नींद आ जाती है. नींद मन की एक प्रव्रत्ति होती है तथा मन-मस्तिष्क के लिए टॉनिक की तरह कार्य करती हैअतः मानसिक स्वास्थ्य के लिए नींद का उचित रूप, समय और मात्रा में होना आवश्यक होता है.
चिकित्सा - अनिद्रा से परेशां व्यक्ति को सर्पगंधा घन वटी, ब्राह्मी वटी, शंखपुष्पी टेबलेट - इनकी १-१ गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेनी चाहिए तथा सुबह-शाम दूध के साथ एक-एक चम्मच बादाम पाक का सेवन करना चाहिए.

Question - मेरा दिलोदिमाग चिंता एवं आशंका से ग्रसित रहता है? क्या इसका आयुर्वेद में कोई इलाज है?
Answer - चिंता किसी भी परेशानी, समस्या, दुःख , शोक, विषाद आदि के कारण हो सकती है. ऐसी स्थिति में चिंता करने के बजाये स्वच्छ चिंतन करना ही श्रेयस्कर होता है ताकि सकारात्मक बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सके. चिंता से ही मानसिक भ्रम पैदा होता है जिसे आशंका भी कहा जाता है. ऐसी स्थिति में निम्नलिखित चिकित्सा करें.
चिकित्सा - दिव्य रसायन वटी २ गोली, स्मृतिसागर रस तथा ब्राह्मी वटी की १-१ गोली सुबह-शाम दूध के साथ ३ माह तक लें. इसके साथ ही दोनों वक़्त के भोजन उपरान्त अश्वगंधारिष्ट और हेमोल सिरप की ४-४ चम्मच आधा कप पानी में मिला कर लें.

Question - मेरा रात में नींद में वीर्य निकल जाता है ? क्या इसका आयुर्वेद में कोई इलाज है?
Answer - रात में नींद में या स्वप्न में वीर्य निकल जाने को स्वप्नदोष कहा जाता है. इस रोग से पीड़ित युवकों के इमेल्स हमें भारी मात्रा में मिलते हैं अतः इस विषय पर हमने सम्पूर्ण विवरण एक seperate आर्टिकल में दिया है जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं --> http://www.biovatica.com/nocturnal_emission.htm
यहाँ भी कुछ उपचार प्रस्तुत हैं - मृगनाभ्यादि वटी और वीर्य शोधन वटी की १-१ गोली सुबह शाम दूध के साथ तीन माह तक सेवन करें. इस दौरान कामुक चिंतन व् वातावरण से पूर्णतः दूर रहें. कब्ज़ न रहने दें और आवशक हो तो स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण या कब्जीना चूर्ण की एक चम्मच रात को सोते समय पानी के साथ लें.

Question -श्वेत प्रदर(shwet pradar , leucorrhoea ) का आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - श्वेत प्रदर आयुर्वेदिक चिकित्सा - अशोक टेबलेट तथा चंद्रप्रभा वटी विशेष नंबर १ की २-२ गोली सुबह शाम दूध के साथ लें. इसके साथ ही एक-एक चम्मच सुपारी पाक भी लें. दोनों वक़्त के भोजन उपरांत अशोल सिरप व् हेमोल सिरप की ४-४ चम्मच आधा कप पानी के साथ लें.

Question - मधुमेह (diabetes ) के लिए आयुर्वेदिक उपचार व् औषधियां बताइये ?
Answer - मधुमेह के रोगी में पेशाब से शर्करा निकलने से व्यक्ति को रात में २-३ बार मूत्र त्याग के लिए उठना पड़ता है. योग-प्राणायाम करने तथा प्रतिदिन ४५ मिनट तेज चाल से घूमने के साथ-साथ निम्न औषधियों के प्रयोग से रक्त में शर्करा का स्तर मानक स्तर पर बना रहता है. इस रोग का नियंत्रित रहना ही इसका इलाज होता है क्योंकि बढ़ी हुई शर्करा से होने वाली क्षति से उत्पन्न उपद्रव ही इसे घातक रोग बनाते हैं. यदि रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य बना रहे तो नेत्र ज्योति का हास, मोतियाबिंद, वृक्कपात (renal failure ), नपुंसकता, ह्रदय रोग तथा तंत्रिकीय समस्याओं से बचाव हो जाता है.
चिकित्सा - दोनों वक़्त के भोजन से पूर्व शिलाप्रमेह वटी की २-२ गोली का सेवन करें तथा रात में सोते समय फीके दूध के साथ वसंत कुसुमाकर विशेष की एक गोली का सेवन करें.

Question - रक्ताल्पता के लिए आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - रक्तोजिन टेबलेट तथा दिव्य रसायन वटी की २-२ गोली सुबह पानी से लें. दोनों वक़्त के भोजन उपरांत हेमोल सिरप की ४-४ चम्मच आधे कप पानी में मिला कर लें.

Question - कब्ज़ के आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - कब्ज़ से पीड़ित व्यक्ति को दिन में कम से कम ३-४ लीटर पानी पीना चाहिए तथा भोजन में रेशेदार आहार जैसे हरी साग-भाजी , चोकरयुक्त आटे की रोटी, दलिया आदि शामिल करके तथा मैदे से बने हुए एवं टेल हुए गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का सर्वथा त्याग करके निम्नलिखित औषधियों का, कब्ज़ से मुक्ति होने तक सेवन करना चाहिए.
चिकित्सा - मुक्ताजेम टेबलेट और गैसोल टेबलेट की २-२ गोली सुबह-शाम पानी से लें. दोनों वक़्त के भोजन उपरांत ४-४ चम्मच कब्जीना सिरप पानी में मिलकर पियें. यदि आवश्यकता हो तो १ चम्मच स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण रात को सोते समय पानी के साथ लें और पेट पूरा साफ़ होते ही बंद करके अपने आहार द्वारा कब्ज़ से बचाव करें. कारण यह है की कोई भी विरेचक औषधि का ज़्यादा सेवन करने से उसकी आदत पद जाती है और फिर उसका सेवन किये बिना मलत्याग नहीं होता.

Question - दांत के रोग जैसे दांतों में ठंडा गरम लगना, दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन या उनसे मवाद या खून आना आदि समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - नियमित रूप से सुबह और रात को सोने से पहले दंतप्रभाकर मंजन से दांतों को साफ़ करने से इन सभी समस्याओं में लाभ मिलता है.

Question - बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज बताइये ?
Answer - ज्वरान्तक टेबलेट २-२ गोली सुबह, दोपहर और शाम, दिन में ३ बार पानी से लें और इन खुराकों के एक घंटे बाद ज्वरान्तक सिरप की ४-४ चम्मच पानी के साथ लेने से बुखार उत्तर जाता है.

Question - मेरी उम्र ४० वर्ष है. मैं बहुत दुबला पतला हूँ . मेरा वज़न भी कम है. स्वास्थ्य बढ़ाने व् स्फूर्ति बढ़ाने के लिए कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आप मकरध्वज (स्वर्णयुक्त ) की १-१ गोली पीसकर शहद या मलाई में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें. दोनों समय के भोजन के बाद द्राक्षासव स्पेशल की ४-४ चम्मच उतने ही पानी में मिलाकर लें. इससे शरीर में शक्ति, स्फूर्ति व् रोग प्रतिरोधक शक्ति में खूब वृद्धि होगी. रात को सोते वक़्त अश्वगंधादि चूर्ण की १ चम्मच दूध के साथ लें.

Question - मेरी उम्र ४६ वर्ष है. मुझे आंव जाने (aanv jaane ) की शिकायत है. बार-बार मरोड़ हो कर दस्त लगते हैं. वर्षा ऋतू में हर साल ये तकलीफ रहती है. कृपया कोई उपचार बताएं ?
Answer - आप अमीबिका टेबलेट की १-१ गोली सुबह-शाम पानी से लें. दोनों समय के भोजन उपरांत कुटजारिष्ट की ४-४ चम्मच उतने ही पानी में मिलाकर लें. चित्रकादि वटी की भी १-१ गोली सुबह शाम पानी से लें. इतनी औषधियों के आलावा आंव जाने की शिकायत में कुछ परहेज़ भी करने होते हैं. पानी उबाल कर ठंडा कर पियें. तले हुए, मैदे व् बेसन के बने आहारीय पदार्थों का सेवन न करें. भोजन में हलके व् सुपाच्य आहारीय पदार्थ ही लें.

Question - मेरी उम्र ६० वर्ष है . मुझे दमा (asthma ) की शिकायत है. रात को ठण्ड के समय अधिक कष्ट रहता है. कभी-कभी कफ भी आता है. कृपया कोई उपचार बताएं.
Answer - आप श्वास कुठार रस (shwas kuthar ras ) की १-१ गोली सुबह-शाम सेवन करें. दोनों समय के भोजन के उपरांत कनकासव की ३-३ चम्मच उतने ही पानी में मिलाकर लें. श्वासचिंतामणि रस की १ गोली पीसकर शहद में मिलाकर रात को सोते समय लें.

Question - मेरी उम्र ४६ वर्ष है. मुझे घबराहट होती है. कभी कभी रक्तचाप बढ़ जाता है. चलने पर सांस फूल जाती है और छाती में हल्का दर्द भी महसूस होता है. कुछ आयुर्वेदित उपाय बताइये.
Answer - आप मानसिक तनाव एवं चिंता काम करें. नमक का सेवन कम करते हुए निम्न उपचार करें. हृदयार्णव रस और जवाहर मोहरा no. १ की १-१ गोली सुबह शाम पानी से लें. भोजन उपरांत दोनों समय अर्जुनारिष्ट और बालारिष्ट की ३-३ चम्मच मिलाकर इतने ही पानी में मिलाकर पियें. चिकनाईयुक्त पदार्थ, मैदे की व् ताली हुई चीजें न खाएं. प्रतिदिन सुबह घूमने जाएँ.

Question - मैं एक गृहिणी हूँ और मेरी आयु ३२ वर्ष है. मेरी शादी को १० साल हो गए हैं और मेरे २ बच्चे हैं. पिछले २ साल से मासिकस्राव अनियमित हो रहा है और कभी कभी सफ़ेद पानी भी जाता है. बहुत कमज़ोरी लगती है कृपया उचित सलाह दें.
Answer - आपको मासिकधर्म की अनियमितता के साथ साथ श्वेतप्रदर की समस्या भी है. आप निम्न उपचार करें. प्रदरांतक रस की १-१ गोली सुबह शाम पानी से लें. पुष्यानुग चूर्ण १-१ चम्मच सुबह शाम पानी से लें. अशोकारिष्ट और पात्रांगासव की ३-३ चम्मच मिलाकर दोनों वक़्त के भोजन के बाद लें. सुपारी पाक की १-१ चम्मच भी दोनों वक़्त के भोजन के बाद लें. साथ में कुछ परहेज़ भी करें. मिर्च मसालेदार एवं तले हुए आहारीय पदार्थों का सेवन कम से कम करें. गुप्तांग की नियमित सफाई रखें. कम से कम २ माह तक इन दवाओं का नियमित सेवन करें.

Question - मेरे भाई की उम्र ६२ वर्ष है. एक महीने पहले उन्हें दाहिने भाग में पक्षाघात (paralysis ) हुआ था. तब से उनकी स्मरणशक्ति भी कमज़ोर हुई है. कृपया उपचार बताएं.
Answer - आप उन्हें योगेंद्र रस की १-१ गोली पीस कर शहद के साथ सुबह शाम दें. इससे मस्तिष्क व् वातवाहिनी नाड़ियों को बल प्राप्त होगा. भोजन उपरांत अश्वगंधारिष्ट और सारस्वतारिष्ट की ४-४ चम्मच मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ दें. स्मृतिसागर रस की १-१ गोली दोनों समय पानी से दें. पक्षाघात वाले क्षेत्र पर महामाष और महानारायण तेल मिलाकर मालिश करें.

Question - मेरी आयु २८ वर्ष है. मैं खुनी बवासीर से पीड़ित हूँ. मुझे हर वक़्त कब्ज़ रहता है तथा मल त्याग करते समय रक्त आता है और बहुत तेज दर्द होता है जो शौच के २-३ घंटे बाद तक होता रहता है. कृपया उपचार बताएं.
Answer - आप पायराइड और अर्शकुठार रस की १-१ गोली सुबह-शाम पानी के साथ लें. भोजन के बाद दोनों वक़्त ३-३ चम्मच अभयारिष्ट थोड़े पानी में मिला कर लें. सोते समय गुदा पर कासीसादि तेल लगाएं. परहेज - कब्ज़ न रहे इसके लिए हरी शाक सब्ज़ी व् रेशायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें. तेज़ मिर्च मसालेदार, मैदा से बने, गरिष्ठ और देर से पचने वाले पदार्थों का सेवन कतई न करें.

Question - मेरे पुत्र की आयु १७ वर्ष है . अभी कुछ दिनों से उसकी याददाश्त बहुत कमज़ोर हो गयी है. वह याद किया हुआ पाठ भूल जाता है. उसकी स्मरणशक्ति के लिए कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये.
Answer - आप अपने पुत्र को स्मृतिसागर रस की १-१ गोली सुबह शाम पानी के साथ दें. दोनों वक़्त के भोजन के उपरान्त सारस्वतारिष्ट १-१ बड़ा चम्मच आधा कप पानी में मिलाकर दें. यह प्रयोग लगातार कम से कम तीन महीने करें.

Question - मेरी आयु ३६ वर्ष है. मुझे हर समय कफ और खांसी की शिकायत बनी रहती है. सर्दी भी बनी रहती है और दिन भर कमजोरी बनी रहती है.
Answer - आप लक्ष्मी विलास रस नारदीय १-१ गोली सुबह-शाम गरम पानी के साथ लें. इसके थोड़ी देर बाद तालीसादि चूर्ण आधा चम्मच, शहद में मिला कर दोनों वक़्त लें. इसके आधा घंटे बाद च्यवनप्राश स्पेशल १-१ चम्मच एक कप गुनगुने गर्म दूध के साथ लें. तीनों औषधियां सुबह शाम खाली पेट लेनी हैं. परहेज - खट्टी और ठंडी चीजें, दही, फ्रिज में राखी चीजों का सेवन न करें.

Question - मेरी आयु २६ वर्ष है. मुझे विवाह से पहले स्वप्नदोष की शिकायत थी और विवाहोपरांत शीघ्रपतन की शिकायत हो गयी है. कृपया इसका कोई आयुर्वेदिक उपचार बताएं.
Answer - आप मन्मथ रास १-१ गोली और धातु पौष्टिक चूर्ण १-१ बड़ा चम्मच सुबह-शाम खाली पेट दूध के साथ लें. सोते समय वीटा एक्स गोल्ड प्लस एक कैप्सूल भी लें. खटाई न खाएं, कब्ज़ न होने दें. कामुक चिंतन न किया करें. दिनचर्या का नियमित पालन करें.

Question - मेरी आयु २९ वर्ष है. मुझे चलने पर सांस भर आती है. जांच में ECG में गड़बड़ आयी है. डॉक्टर के अनुसार ह्रदय की कमज़ोरी है. कृपया कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये.
Answer - आप हृदयावर्ण रस की १-१ गोली सुबह-शाम पानी से लें. अर्जुनारिष्ट स्पेशल की ४-४ चम्मच बराबर मात्रा में पानी में मिलाकर भोजन के बाद लें. लगातार ३-४ महीने दवाओं का सेवन करें.

Question - मेरी आयु ३६ वर्ष है. मुझे रात के समय पीठ व् पेअर पर फुंसियां हो जाती हैं व् उनमे खुजली चलती है. हाथों व् चेहरे पर धब्बे हैं. इसका कोई आयुर्वेदिक उपचार बताएं.
Answer - आप कैशोर गुग्गुल की १-१ गोली सुबह-शाम सेवन करें. सुरकता ३-३ चम्मच सामान मात्रा के पानी में सुबह-शाम लें. हरिद्राखंड की १-१ चम्मच दिन में २ बार लें. नीम की पत्ती डाल कर उबाले हुए पानी से स्नान कर लें. खुजली के स्थान पर महा मरिच्यादि तेल लगाएं.

Question - मेरी आयु ४५ वर्ष है. मुझे भूख कम लगती है. हीमोग्लोबिन कम है. कभी-कभी उलटी होती है व् पेट में दर्द रहता है. आँखों में पीलापन है.
Answer - आप आरोग्यवर्धिनी टेबलेट व् ताप्यादी लौह की १-१ गोली सुबह-शाम पानी से लें. dono वक़्त के भोजन के बाद कुमारी आसव स्पेशल + रोहितकारिष्ट मिलाकर ४-४ चम्मच सामान मात्रा के पानी के साथ लें. हरी सब्ज़ियां, दाल, सलाद का सेवन अधिक करें. ताली चीजें, मैदी की वस्तुएं न खाएं. तेल, घी का सेवन न करें.

Question - मेरी आयु ३२ वर्ष है. मुझे मासिक ऋतू स्त्राव के समय हाथ, पैरों एवं पेट में दर्द रहता है, थकान लगती है, चिड़चिड़ापन आ जाता है.
Answer - आप सुंदरी सखी सिरप (पूर्व नाम सुन्दरीकल्प ) ३-३ चम्मच समभाग पानी में मिलाकर सुबह शाम लें. भोजन के बाद अशोकारिष्ट मिला कर ४-४ चम्मच सुबह शाम लें. हल्का व्यायाम करें. भोजन में सलाद का सेवन अधिक करें.

Question - मेरी पत्नी की उम्र ३० वर्ष है, २ माह पूर्व उसने सामान्य प्रसव द्वारा एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है. समस्या यह है की उसे बहुत थकान होती है तथा स्तनों में दूध कम आता है. इसके लिए कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये.
Answer - स्पिरुविन १-१ गोली सुबह-शाम पानी से देने से उनकी थकान दूर होगी. शतावर्यादि चूर्ण १०० ग्राम में सफ़ेद जीरा १० ग्राम पीस कर मिला दें और इसकी १-१ चम्मच प्रातः शाम दूध के साथ दें. सुपारी पाक १ चम्मच प्रातः खाली पेट पानी के साथ सेवन करें. दोनों वक़्त के भोजन के बाद दशमूलारिष्ट स्पेशल की ३-३ चम्मच समभाग पानी में मिला कर दें.

Question - मेरी शादी हुए एक साल हो गया है. शादी से पहले मुझे हस्तमैथुन की आदत थी. फिलहाल मैं शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हूँ. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आप मंथन रस की १-१ गोली पानी के साथ और सिद्ध मकरध्वज स्पेशल की १-१ गोली दूध के साथ सुबह-शाम लें. इसी के साथ धातुपौष्टिक चूर्ण १-१ चम्मच लें. दोनों वक़्त के भोजनोपरांत अश्वगंधारिष्ट स्पेशल की ३-३ चम्मच संभाग पानी में मिला कर लें.

Question - मेरी उम्र ५२ साल है. पिछले २ सालों से मैं घुटनों के दर्द से पीड़ित हूँ. बैठ कर उठने पर अत्यधिक पीड़ा होती है. कृपया कोई आयुर्वेदित उपचार बताएं?
Answer - आप बृहत् वात चिंतामणि रस और महावात विध्वंसन रस दोनों की १-१ गोली सुबह-शाम पानी के साथ लें. भोजन के बाद दोनों वक़्त महारास्नादि काढ़ा ३-३ चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पियें. घुटनों पर प्रसारिणी और महानारायण तेलों को मिलाकर मालिश किया करें. खटाई और पचने में भारी पदार्थों का सेवन न करें.

Question - मेरी उम्र ४५ साल है. मुझे भूख कम लगती है तथा पेट ठीक से साफ़ नहीं होता. पेट में गैस बनने की समस्या भी रहती है. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये?
Answer - आप गैसांतक टेबलेट की १-१ गोली सुबह-शाम पानी के साथ लें. दोनों वक़्त भोजन के बाद पंचासव २-२ चम्मच सामान मात्रा में पानी में मिलाकर लें. रात को सोते समय २ चम्मच इसबगोल की भूसी और आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण मिलाकर कुनकुने गरम पानी के साथ लिया करें. मैदा और बेसन के बने, चिकनाई युक्त, तले हुए और पचने में भारी पदार्थों का सेवन न करें या कम से कम करें. सुबह रोज आधा घंटा तेज़ चाल से घूमा करें.

Question - मेरी आयु ३२ साल है और मेरे दो बच्चे हैं. पिछले २ सालों से मुझे सफ़ेद पानी जाने की शिकायत हो गई है जिससे कमर और पैरों में दर्द रहता है और शरीर में बहुत कमज़ोरी महसूस होती है.
Answer - आप प्रदारांतक रस १-१ गोली और पुष्यानुग चूर्ण १-१ चम्मच सुबह-शाम लें. ४-४ चम्मच पंतरागासव और लोध्रासव मिलाकर पानी के साथ दोनों वक़्त लें. सुपारी पाक १-१ चम्मच दूध के साथ लें.

Question - मेरी आयु ६० वर्ष है. शुगर और रक्तचाप तो सामान्य रहते हैं पर शारीरिक दुर्बलता रहती है. कृपया कोई शक्तिवर्धक आयुर्वेदिक औषधि और उपचार बताएं.
Answer - आप मकरध्वज की १-१ गोली और केशरिकल्प १-१ चम्मच सुबह शाम दूध के साथ लें. दोनों वक़्त के भोजन के बाद आधे कप पानी में अश्वगंधारिष्ट व् बालारिष्ट की ३-३ चम्मच डाल कर पियें.

Question - मुझे गाठ तीन माह से हल्का बुखार बना रहता है. शरीर में बहुत कमज़ोरी महसूस होती है, कृपया कोई आयुर्वेदिक औषधि या उपचार बताएं.
Answer - आप ब्राह्मी वटी स्वर्णयुक्त और वसंत मालती रस १-१ गोली सुबह शाम पानी के साथ लें.

Question - मुझे बार बार सर्दी-खांसी हो जाती है. अंग्रेजी दवाओं से तात्कालिक लाभ हो जाता है, कृपया इस समस्या का कोई स्थाई आयुर्वेदिक उपचार बताएं.
Answer - आप सितोपलादि चूर्ण आधा चम्मच, शहद में मिलाकर, दिन में ३ बार चाट कर सेवन करें. च्वनप्राश स्पेशल १-१ बड़ा चम्मच सुबह-शाम दूध से लें. दोनों वक़्त के भोजन के बाद, बालारिष्ट ३-३ चम्मच, आधा कप पानी के साथ लें.

Question - मेरी आयु ४२ साल है. मुझे खट्टी डकार आती है. गले में जलन होती है और कभी कभी चक्कर भी आते हैं. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आपको एसिडिटी की तकलीफ है. आप सूतशेखर रस की १-१ टेबलेट सुबह शाम पानी से लें. अविपत्तिकर चूर्ण १-१ चम्मच भोजन के बाद सेवन करें. दाडिमावलेह २-२ चम्मच २ बार पियें. मिर्च मसाले व् तली हुई चीजों का सेवन न करें.

Question - मेरी आयु ५४ साल है. मुझे शौच के साथ आंव आती है. पेट में दर्द रहता है. बहुत परेशां हूँ. कोई आयुर्वेदित इलाज बताइये ?
Answer - आपको अम्बियेसिस की तकलीफ है.आप अमीबिका टेबलेट १-१ सुबह शाम पानी से लें. कुटजारिष्ट ४-४ चम्मच दवा बराबर पानी मिला कर भोजन के बाद लें. मिर्च मसाले व् तली चीजों का सेवन न करें. प्रातः घूमने का अभ्यास करें.

Question - मेरी पत्नी के आयु ५४ साल है. एक महीने पहले दाहिने भाग का पैरालिसिस हुआ है. तब से स्मरणशक्ति कमज़ोर हुई है. कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये ?
Answer - योगेंद्र रस १-१ टेबलेट सुबह शाम शहद के साथ दें. इससे मस्तिष्क एवं वातवाहिनी नाड़ियों को बल मिलता है. भोजन के बाद अस्व्गंधारिष्ट और सारस्वतारिष्ट मिला कर ४-४ चम्मच दवा पानी से दें. स्मृतिसागर रस १-१ टेबलेट २ बार पानी से दें. पक्षाघात वाले स्थान पर महामाष व् महानारायण तेल मिला कर मालिश करें.

Question - मेरी आयु ३२ साल है. मुझे सफ़ेद पानी की शिकायत है. २ वर्ष पहले कमर में दर्द रहता है. २ बच्चे हैं. छोटा बच्चा ३ साल का है, कमज़ोरी आ गयी है. माहवारी भी कभी कभी रेगुलर नहीं होती.
Answer - आप प्रादारांतक रस की १-१ टेबलेट और पुष्यानुग चूर्ण १-१ चम्मच सुबह शाम पानी से सेवन करें. पत्राङ्गासव व् लोध्रासव मिला कर ४-४ चम्मच दवा बराबर पानी मिला कर भोजन के बाद लें. सुपारी पाक १ चम्मच रात में दूध के साथ लें. सफाई पर ध्यान दें. पानी उबाल कर उसमे फिटकरी का थोड़ा पाउडर डाल कर जननांगों की सफाई करें. गरम मसालेदार चीजों का सेवन न करें .

Question - मेरी आयु ४५ वर्ष है. मैं १० साल से दमा से पीड़ित हूँ. चलने पर सांस फूल जाती है. कोई आयुर्वेदिक इलाज बताइये?
Answer - श्वास कुठार रस १-१ टेबलेट सुबह शाम पीस कर शहद से लें. कनाकसव ३-३ चम्मच दवा बराबर पानी मिला कर भोजन के बाद लें. च्यवनप्राश स्पेशल १ चम्मचरित्री में लें. ठंडी वस्तुएं , तली चीजें, आइसक्रीम , दही, केला इत्यादि का सेवन न करें.

Question - मेरी आयु ५२ साल है. मुझे पेट में गैस रहती है, भूख भी कम लगती है, पेट साफ़ नहीं रहता. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आप गैसांतक टेबलेट १-१ सुबह शाम पानी के साथ लें. भोजन के बाद पंचासव २-२ चम्मच सामान मात्रा में पानी में मिलकर दोनों समय लें. रात्रि में १-१ चम्मच त्रिफला चूर्ण व् इसबगोल की भूसी मिला कर कुनकुने गर्म पानी से लें.

Question - मेरी पत्नी की आयु २९ साल है. २ माह पूर्व डिलीवरी हुई है. थकान रहती है, स्तनों में दूध कम आता है. कुछ स्वास्थ्यवर्धक आयुर्वेदिक इलाज बताएं. ?
Answer - वे स्पिरुवीन १-१ टेबलेट सुबह शाम पानी के साथ लें. इसमें प्रोटीन, विटामिन्स व् मिनरल्स होने से थकान दूर होगी. शतावर्यादि चूर्ण १०० ग्राम में जीरा सफ़ेद १० ग्राम पीस कर मिला लें. १-१ चम्मच सुबह शाम दूध के साथ लें. सुपारी पाक एक चम्मच सुबह पानी के साथ लें. दशमूलारिष्ट स्पेशल ३-३ चम्मच संभाग में पानी से दोनों समय भोजन के बाद लें.

Question - मैं बवासीर के कारण बहुत तंग आ गई हूँ. बार बार कब्ज़ होकर खून जाता है, बहुत दर्द होता है. कोई कारगर आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आपको बवासीर के साथ फिशर की भी शिकायत है. आप निम्न उपचार करें. पायराइडस १-१ टेबलेट २ बार पानी से लें. अभयारिष्ट ३-३ चम्मच २ बार भोजन के बाद लें. अर्श कुठार रस १-१ टेबलेट २ बार लें. कासीसादि तेल गुदा मार्ग में लगाएं. कब्ज़ियत न होने दें. हरी सब्ज़ियों का सेवन करें. मिर्च मसाले व् तली चीज़ों का सेवन न करें.

Question - मेरी आयु ३५ वर्ष है. बचपन की गलतियों के कारण शीघ्रपतन होता है. कृपया कोई शक्तिवर्धक व् स्तम्भक आयुर्वेदिक उपचार बताएं ?
Answer - आप सिद्ध मकरध्वज स्पेशल १-१ टेबलेट सुबह शाम लें. मन्मथ रस १-१ टेबलेट २ बार लें. धातुपौष्टिक चूर्ण १-१ चम्मच दो बार सेवन करें. भोजन के बाद अश्व्गन्धारीश स्पेशल ३-३ चम्मच २ बार लें.

Question - मेरी आयु २९ साल है. मैं चलता हूँ तो सांस भर आती है. डॉक्टर ने जांच में ह्रदय की कमज़ोरी बताई है. ECG में थोड़ा अंतर है. कभी कभी घबराहट भी होती है. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आप हृदयार्णव रस १-१ टेबलेट सुबह शाम पानी से लें. प्रभाकर टेबलेट १-१ दो बार सुबह शाम पानी से लें. अर्जुनारिष्ट स्पेशल ४-४ चम्मच दवा बराबर पानी में मिलकर भोजन के बाद लें. लगातार ३-४ महीने दवा लें. आदिक तेज़ न चलें. तनाव से बचें.

Question - मेरी इन्द्रिय के मूत्र मार्ग के पास घाव है, पेशाब भारी जलन के साथ, लाल रंग का, बून्द-बून्द करके आता है. मूत्र के साथ रक्त और पीप निकलता है. इन्द्रिय को दबाने पर मूत्र मार्ग से पीप निकलता है. कमर में भारीपन व् कब्ज़ रहता है कभी कभी बुखार हो जाता है.
Answer - आपको सुजाक रोग हो गया है. यह रोग सुजाक रोग से पीड़ित स्त्री से सम्भोग करने पर पुरुष को और सुजाक रोग से पीड़ित पुरुष से सम्भोग करने पर स्त्री को हो जाता है. चरित्रहीन युवक या युवती ही इस महा भयानक रोग से पीड़ित होते हैं और भयंकर कष्ट भोगते हैं. मन के कहने में आकर दो घडी मौज-मजा करने का परिणाम कितना भयंकर होता है यह भुक्त भोगी ही जानता है.
सुजाक का इलाज - रात को सोते समय कब्जीना चूर्ण या स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण एक चम्मच, गर्म पानी के साथ लें ताकि सुबह दस्त साफ़ हो सकें. एक गिलास कच्चा दूध और एक गिलास पानी मिलाकर एक चम्मच पीसी मिश्री डाल कर घोल लें और सुबह शाम पियें. इससे पेशाब खुल कर आएगा और जलन शांत होगी. ताज़े मीठे और जमे हुए दही की लस्सी बना कर इसमें जवाखार एक चम्मच डाल कर पीने से पेशाब खुल कर होता है.
सुजाक के लिए आयुर्वेदिक नुस्खा - स्वर्ण बंग व् गंधक रसायन १०-१० ग्राम, रोप्य भस्म, शीतल पर्पटी व् प्रवाल पिष्टी ५-५ ग्राम - इन सबको मिला कर ३० पुड़िया बना कर १-१ पुड़िया शहद में मिलाकर सुबह शाम लें. इसके एक घंटे बाद पांच निम्बादि वटी और आरोग्यवर्धिनी वटी विशेष नंबर १ की २-२ गोली पानी के साथ ले लें. भोजन के बाद दोनों वक़्त, रक्तशोधांतक और चंदनासव ४-४ चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पियें. पूर्ण लाभ न होने तक चिकित्सा जारी रखें.

Question - मेरे शरीर में जलन, पेशाब में रुकावट, इन्द्रिय और अंडकोषों में जलन व् पीड़ायुक्त शोथ, नींद न आना, घबराहट, बेचैनी, अग्निमांध, प्यास अधिक लग्न, रक्तदूषित हो कर शरीर पर चकते होना आदि लक्षण हैं.
Answer - आपको उपदंश रोग है. यह रोग भी सुजाक की तरह उपदंश पीड़ित स्त्री-पुरुष से सम्भोग करने पर होता है. यह अति कठिन साध्य रोग है अतः धैर्यपूर्वक पूरा लाभ न होने तक चिकित्सा जारी रखना चाहिए.
उपदंश की आयुर्वेदिक चिकित्सा - व्याधिहरण रसायन और प्रवाल पिष्टी ५-५ ग्राम, गंधक रसायन ६४ भावना और मंजिष्ठादि ताल सिंदूर १०-१० ग्राम - सबको मिलाकर ३० पुड़िया बना लें. एक-एक पुड़िया शहद के साथ सुबह शाम लें. उपदंश के स्थान पर पारदादि मलहम सुबह शाम पूर्ण लाभ न होने तक लगाए.

Question - मुझे कब्ज़ की शिकायत हमेशा बानी रहती है, खुल कर भूख नहीं लगती, गाल पिचके और आँखें धंसी हुई हैं. सबसे बड़ी शिकायत है स्वप्नदोष की, बहुत दुखी और परेशान हूँ. सप्ताह में दो तीन बार स्वप्नदोष हो जाया करताहै. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये?
Answer - आजकल ऐसी स्थिति अधिकाँश युवकों की है. आप उचित आहार विहार और दिनचर्या का पालन करें ताकि कब्ज़ न रहे, खुल कर भूख लगे और शरीर भरने लगे ताकि गाल भी भर जाएँ, पिचके हुए न रहें. इसी के साथ मन कभी इलाज करें यानी मन शुद्ध विचारों वाला रखें. कामुक चिंतन न करें, अनावश्यक रूप से कामोत्तेजित न हुआ करें. प्रसन्न और निश्चिन्त रहा करें. स्वप्नदोष के होने से चिंतित न हुआ करें. रात को जल्दी सो जाया करें और सुबह जल्दी उठ कर सूर्योदय से पहले शौच व् स्नान कर लिया करें. रात को सोने से तीन घंटे पहले खाना खा लिया करें और सोते समय दूध न पिया करें.
आयुर्वेदिक उपचार - वीर्यशोधन वटी और चन्द्रप्रभा विशेष नंबर १ की दो दो गोली सुबह शाम लाभ न होने तक सेवन करें. पेट साफ़ रखने के लिए कब्जीना चूर्ण १ चम्मच रात को सोते समय एक कप गर्म पानी के साथ ले लिया करें. सोने से पहले शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए.

Question - मेरी इन्द्रिय छोटी है और हस्तमैथुन करने के कारण टेढ़ा भी है. क्या मुझे संतान पैदा करने में दिक्कत आएगी?
Answer - नहीं, संतान पैदा करने में ये दोनों स्थितियां बाधक नहीं होती. संतान पैदा करने के लिए वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या (स्पर्म काउंट ) ६० मिलियन से अधिक होना चाहिए और उनमे जीवनी शक्ति (motality ) का प्रतिशत भी अच्छा होना चाहिए. इसकी जानकारी आप वीर्य (semen ) की जांच करवा कर प्राप्त कर सकते हैं. यदि इन्द्रिय छोटी न होकर खासी बड़ी भी हो और टेढ़ापन भी न हो फिर भी यदि शुक्राणुओं की संख्या पर्याप्त न हो और जीवनी शक्ति का प्रतिशत कम हो तो संतान पैदा नहीं की जा सकती.

Question - यदि कोई पुरुष लम्बे समय तक सहवास न करे तो क्या वह नपुंसक हो जायेगा?
Answer - जी हाँ, आयुर्वेद में इस स्थिति को ब्रह्मचर्यजन्य नपुंसकता कहते हैं. लेकिन ये नपुंसकता स्थाई नहीं होती और न ही इसे दूर करने के लिए दवा इलाज की जरुरत होती है. यदि ऐसा पुरुष अच्छे खुशनुमा वातावरण में, प्रोत्साहित उमंग भरी मानसिकता के साथ, तीन चार बार सहवास करने का प्रयास करे तो उसका सोया हुआ पौरुषबल जाग जायेगा और उसकी नपुंसकता दूर हो जायेगी.

Question - मुझे नपुंसकता की शिकायत हो गयी है. बिलकुल भी कामोत्तेजना नहीं होती. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - यह शिकायत होना आजकल आम बात हो गयी है. गलत आचार विचार इसका प्रमुख कारण है. आप यह चिकित्सा तीन माह तक नियमपूर्वक करें :-
चिकित्सा - काम चूड़ामणि रस, दिव्य रसायन वटी १-१ गोली और गोक्षुरादि चूर्ण एक चम्मच चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ लें. रात को सोते समय इन्द्रिय के अग्रभाग को छोड़कर शेष इन्द्रिय पर मस्ती तेल उँगलियों से लगाएं और उँगलियों से ही हलके हलके मसाज करें.

Question - मुझे ५-७ साल से मधुमेह को शिकायत है. कुछ दिनों से यौनशक्ति बिलकुल ख़त्म हो गयी है . पत्नी सहवास में रूचि नहीं रही है और नपुंसकता आ गयी है. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आपकी नपुंसकता मधुमेह रोग के कारण पैदा हुई है. आप यह चिकित्सा करें - वसंत कुसुमाकर रस, शिलाजत्वादि वटी अम्बरयुक्त और विगोजेम टेबलेट - तीनों की १-१ गोली सुबह शाम फीके दूध के साथ तीन माह तक लें. ब्रह्मचर्य का पालन करें. मिठाई, मीठे पदार्थ, खटाई और खट्टे पदार्थों का सेवन न करें.

Question - मुझे शीघ्रपतन की शिकायत हो गयी है. स्तम्भन शक्ति बिलकुल ख़त्म हो गयी है. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये ?
Answer - आप तीन माह तक ऊपर बताया हुआ परहेज करते हुए वीर्य स्तम्भन वटी, विगोजेम और दिव्य रसायन वटी की १-१ गोली सुबह शाम दूध के साथ लें और इसी के साथ अश्वगंधा पाक १०-१० ग्राम सुबह शाम कहते हुए, साथ में दूध पियें.

Question - मुझे बार बार पेशाब आता है. पेशाब के साथ वीर्य भी निकलता है. शरीर कमज़ोर और चेहरा निस्तेज हो गया है. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये?
Answer - आप बहुमूत्रान्तक रस और चन्द्रप्रभा वटी विशेष नंबर १ की २-२ गोली, सुबह शाम दूध के साथ, लाभ न होने तक ले.

Question - मेरे स्तन बहुत ही छोटे हैं. इस कारण मुझमे हीन भावना आ गयी है. सहेलियां मज़ाक उड़ाती हैं. कोई आयुर्वेदिक उपचार बताइये?
Answer - आप गंभारी की छल ५० ग्राम लेकर कूट पीस कर खूब महीन बारीक़ चूर्ण कर लें. इसे जैतून के तेल में मिला कर गाढ़ा लेप बना लें. इसे सुबह नहले से पहले स्तनों पर लगाकर मालिश करें. रात को सोते समय लेप कर मालिश करें और सुबह स्नान करते समय धो लें. Biovatica .Com के ब्रेस्ट केयर पेज पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और चार प्रकार के जो व्यायाम बताये गए हैं उनका रोज़ाना अभ्यास करें. ३-४ माह में स्तनों का आकर सुडौल व् पुष्ट हो जायेगा.


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