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योग और योग मुद्राओं के विषय में लिखे अपने पिछले आर्टिकल में हमने यह आश्वासन दिया था की हमें ईमेल भेजने वाले biovatica .कॉम के हज़ारों वेबसाइट विज़िटर्स के आग्रहपूर्ण सुझाव का पालन करने के लिए हम ऐसे योगासनों की जानकारी प्रस्तुत करेंगे जो युवकों के यौन-विकार दूर करने और युवतियों के वक्षस्थल, पेट व् कमर को सुडौल बनाने में सहायक सिद्ध हुए हैं. इस आश्वासन को पूरा करने के लिए हम ऐसे ही आसनों और बांधों का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं . नियमित रूप से प्रतिदिन प्रातः नित्यकर्मों से निवृत होकर २०-२५ मिनट का समय योगासनों के लिए देकर, निरंतर अभ्यास करने पर, निश्चित रूप से लाभ मिलने लगेगा.
यौन-विकारों को दूर करने के लिए सबसे पहला काम है मन की शुद्धि , स्थिरता और सात्विकता को उपलब्ध कर मनोबल का विकास करना. मन की एकाग्रता से उसी प्रकार मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और मनोबल बढ़ता है जैसे आतिशी शीशे से सूर्य की किरणों को एकाग्र करने पर ऊष्मा सघन, सशक्त और तीव्र प्रभाव वाली होकर इतनी बढ़ जाती है की इन किरणों को एकाग्र कर कागज़ पर डालने से कागज़ जरा सी देर में जल उठता है.
मन की एकाग्रता या ध्यान के लिए पद्मासन लगा कर और तन कर बैठना चाहिए और आँखें बंद कर मन को एकाग्र करने का अभ्यास करना चाहिए. एकाग्रता सिद्ध होने के बाद इस एकाग्रता को भी मन से हटा देना चाहिए और मन को विषय रहित करने का अभ्यास करना चाहिए. मन के विषय रहित (निर्विषय ) हो जाने को ही 'ध्यानं निर्विषय मनः ' के अनुसार 'ध्यान' (meditation ) करना कहते हैं. एकाग्रता और ध्यान के बिना , योग का अभ्यास करना सिर्फ शारीरिक कसरत करना होता है, योगाभ्यास करना नहीं.

पद्मासन में एकाग्रता का अभ्यास करने के बाद, दोनों हाथ घुटनों पर रख कर, सांस बाहर फेंक दें और पेट जितना अंदर खींच सकें , उतना खींच कर रखें. यह उड्डियान बांध है . थोड़ी देर यह अभ्यास करें फिर मूलबन्ध लगाएं . गुड को ऊपर की तरफ खींच कर रखना मूलबन्ध है. जितनी देर तक खींच कर रख सकें, खींचे रखें , फिर छोड़ दें. थोड़ी देर ठहर कर फिर मूलबन्ध लगा लें. ऐसा बार बार करें और धीरे धीरे मूलबन्ध लगाए रखने का समय और अभ्यास बढ़ाते जाएँ. शीघ्रपतन के रोगी के लिए मूलबन्ध का दीर्घकालीन अभ्यास बहुत हितकारी होता है. यह बिना दावा का इलाज है क्योंकि जितनी देर तक मूलबन्ध लगा रहेगा उतनी देर तक वीर्यपात हो ही नहीं सकेगा. अभ्यास करके मूलबन्ध लगाए रखने की अवधि बढ़ाई जा सकती है. यह अभ्यास दिन में कभी भी, कहीं भी , और कितनी ही बार किया जा सकता है. यौनक्षमता और स्तम्भनशक्ति बढ़ाने में इस क्रिया का कोई जवाब नहीं.

अश्विनी मुद्रा भी बहुत उपयोगी है. गुदा को बार बार अंदर खींचना व् छोड़ना 'अश्विनीमुद्रा' है. यह क्रिया यौनांग-संसथान को बलवान बनाती है और नपुंसकता को दूर करती है. इसे ही प्राणायाम और श्वास-संतुलन के साथ वज्रासन में बैठ कर किया जाए तो यह 'शक्तिचालिनी मुद्रा' कहलाती है जो कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत कर आत्मोन्नति करती है. इन क्रियाओं के साथ सूर्यनमस्कार,सर्वांगासन, शलभासन और भुजंगासन का नियमित अभ्यास करके, अंत में शवासन लगा कर दस मिनट विश्राम करना चाहिए. इतने उपाय नियमित रूप से करते रहने से यौनदुर्बल्य और स्वप्नदोष, शीघ्रपतन आदि बीमारियां पास नहीं फटकतीं और यदि हों तो धीरेधीरे दूर हो जाती हैं.
युवतियां अपना शरीर सुडौल बनाने के लिए सूर्यनमस्कार, शलभासन, भुजंगासन, पद्मासन,उड्डीयानबन्ध पश्चिमोत्तानासन , सुप्त वज्रासन, अग्निसार क्रिया, उत्तानपादासन, शशकासन आदि आसनों का नियमित अभ्यास करें और फिर चमत्कार देखें की आपका शरीर कैसा चुस्ती फुर्ती वाला और सुडौल आकर वाला बनता जाता है . अब इन सभी आसनों का सचित्र विवरण विडियो के साथ नीचे हम आपकी सुविधा के लिए दे रहे हैं. biovatica .कॉम के वेबसाइट विज़िटर्स इतना सब नियमित रूप से प्रतिदिन करेंगे तो पूर्ण रूप से स्वस्थ और निरोग शरीर वाले बने रहेंगे.

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Once a website visitor of Biovatica requested us to tell about some Yogasanas (Yoga Poses or Yoga Positions) which are specifically designed for the improvement of the functioning of sexual organs and reproductive system. The yoga asanas whose regular practice provides power and strength to the sexual health, sexual organs and reproductive health.

Sexual diseases arise due to the physical and mental weaknesses. The people who always indulge in mental eroticism and the person who do excessive sexual activities, fall prey to sexual diseases. If a person is mentally and physically strong, then even without any medicine he/she can become strong in context of sexual health. For this, a person should regularly practice yoga, Asanas , bandh and pranayam everyday.

So here we are listing some Yogas, Asanas , Bandhs and Pranayams' Poses and Yoga Positions which are for the benefit of sexual health, sexual organs and reproductive health.

(1) Uddiyana Bandha ( उड्डीयान बंध )

Uddiyana BandhaUddiyana BandhaUddiyana Bandha
Uddiyana Bandha Yoga Poses and Yoga Positions

वज्रासन में बैठकर, दोनों हाथ घुटनो पर रख कर, सांस बाहर रोक कर , पेट को पीठ की तरफ खीँच कर, तब तक रखना, जब तक सांस बाहर ही रोकी जा सके, उड्डियान बंध है | अभ्यास के द्वारा इसका समय बढ़ाना चाहिए | इससे शीघ्रपतन व्याधि दूर होती है और स्थिरता प्राप्त होती है | इसे ३ से ६ बार तक करना चाहिए | कब्ज़ के रोगी इसे न करें |

(2) Agnisar Kriya( अग्निसार क्रिया )

Agnisar KriyaAgnisar KriyaAgnisar Kriya

Agnisar Kriya Yoga Poses and Yoga Positions

खड़े होकर दोनों पैर थोड़े चौड़े कर लें | दोनों हाथ घुटनो पर रखें , सांस बाहर फेंक कर रोक दें और पेट को भीतर खींचें और छोड़ें | ऐसा तब तक करें जब तक सांस रोके रख सकें | यह क्रिया ३०-४० बार करने का अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाएं | इसे ३-४ बार करें | यह क्रिया कब्ज़ के रोगियों के लिए उपयोगी और कब्ज़नाशक है | इससे उड्डियान बंध के लाभ मिलते हैं |

(3) Ashwini Mudra( अश्विनी मुद्रा )

Ashwini MudraAshwini MudraAshwini Mudra
Ashwini Mudra Yoga Poses and Yoga Positions

इसके अभ्यास से कब्ज़, बवासीर और शीघ्रपतन के रोगियों को बहुत लाभ मिलता है | जैसे घोडा लीद करने के बाद गुदामुख को बार बार खोलता व बंद करता है उसी प्रकार वज्रासन में बैठकर गुदामुख को बार बार खींचना व छोड़ना अश्विनी मुद्रा करना है | इसे लगातार ५०-१०० बार करना चाहिए |

(4) Shakti Chalini Mudra ( शक्ति चालिनि मुद्रा )

Shakti Chalini MudraShakti Chalini MudraShakti Chalini Mudra
Shakti Chalini Mudra Yoga Poses and Yoga Positions

पेशाब करते हुए जैसे हम पेशाब को रोकने की क्रिया करते हैं उसी तरह से वज्रासन में बैठकर इस तरह से कल्पना करें की हम पेशाब को रोक रहे हैं और छोड़ रहे हैं | ऐसी क्रिया अंदर खींचने व छोड़ने की ५० से १०० बार करें, यह शक्तिचालिनी मुद्रा है | इससे स्वप्नदोष, शीघ्रपतन आदि दूर होकर , इच्छा के अनुसार समय तक स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है | यह जननेन्द्रिय को मजबूत और कठोर रखती है तथा अति-संवेदनशीलता एवं अति-उत्तेजना पर नियंत्रण रखने की शक्ति प्राप्त होती है |

(5) Mula Bandha or moola bandha ( मूल बंध )

Mula BandhaMula Bandha
Mula Bandha Yoga Poses and Yoga Positions
जैसे शौच की हाजत होने पर उसे रोकने की लिए गुदामुख को अंदर खीँच कर रखते हैं, वैसे ही गुदामुख अंदर खीँच कर रखने को 'मूलबन्ध' कहते हैं | धीरे धीरे इसका समय बढ़ाने का अभ्यास करना चाहिए | मूलबन्ध लगाने का अभ्यास जितना बढ़ेगा, स्तम्भन शक्ति भी उतनी ही बढ़ती जायेगी और शीघ्रपतन की स्थिति समाप्त हो जायेगी क्योंकि मूलबन्ध की स्थिति में वीर्यपतन हो ही नहीं सकता |

(6) Dwipad Utthita Asana ( द्विपाद उत्थित आसन )

Dwipad Utthita AsanaDwipad Utthita Asana
Dwipad Utthita Asana Yoga Poses and Yoga Positions
पीठ के बल ज़मीन पर लेटकर दोनों पैर पटिए की तरह सीधे रख कर इतने ऊँचे उठायें की बिना सर उठाये पैर के अंगूठे दिखने लगें | सांस चलने दें और २५-३० बार सांस लेने तक पैर उठाये रखें फिर धीरे धीरे ज़मीन पर रख दें | पैर उठाकर उसी स्तिथि में रखें, सिर और पीठ उठाकर दोनों हाथों से पैरों को छुएं | इसे उत्तानपादांगुष्ठासन कहते हैं | यह कम उम्र के इकहरे शरीर वाले युवा आयु के लोग कर सकते हैं | इसके बाद धीरे धीरे वापिस जमीन पर लेट जाएँ | इसे २-३ बार करना चाहिए |

(7) Sarvangasana ( सर्वांगासन )

SarvangasanaSarvangasanaSarvangasana
Sarvangasana Yoga Poses and Yoga Positions

सीधे लेटकर पैर उठाकर दोनों हाथों को कूल्हों से लगाकर पूरे शरीर को धीरे धीरे उठते हुए कन्धों के बल पूरा शरीर उठाकर ज़मीन से ९० डिग्री के कोण से रख कर सीधा कर देना चाहिए | दोनों हाथों से कूल्हों को सहायता देते रहना चाहिए | यह सर्वांगासन है | इससे गल-ग्रंथियों को बल मिलता है जो पौरुष ग्रन्थि पर अच्छा प्रभाव डालती है | इसे एक बार, धीरे धीरे अभ्यास बढाकर २ से ३ मिनट तक करना चाहिए |

(8) Shalabhasana ( शलभासन )

ShalabhasanaShalabhasanaShalabhasana
Shalabhasana Yoga Poses and Yoga Positions

पेट के बल लेट कर दोनों हाथ अपने शरीर के पास सीधे जमीन पर रख कर, ठुड्डी जमीन से लगाके, पीछे से पहले एक पैर ४५ डिग्री तक ऊँचा उठायें सांस चलने दें और १०-१५ सांस लेकर पैर नीचे रख दें | इसी तरह फिर दूसरा पैर उठाकर ऐसा ही करें | यह अर्ध-शलभासन है जो मोटे शरीर और बड़े पेट वालों के लिए है | एक साथ दोनों पैर उठने को शलभासन कहते हैं | जिन्हे कमर में दर्द या अकड़न हो वे पहले कुछ दिन तक अर्ध-शलभासन करें फिर शलभासन का अभ्यास शुरू करें |

(9) Bhujangasana ( भुजंगासन )

BhujangasanaBhujangasanaBhujangasana
Bhujangasana Yoga Poses and Yoga Positions

श्वास-क्रिया और फेफड़ों का यौन-क्रिया से बहुत सम्बन्घ रहता है | जिनकी सांस जल्दी फूल जाती है वो अधिक देर तक यौन-क्रिया नहीं कर पाते | जिनका पेट बड़ा व भारी होता है उन्हें बाधा और असुविधा का अनुभव होता है | इन स्तिथियों को सुधारने के लिए भुजंगासन का नियमित अभ्यास करना श्रेष्ठ है | पेट के बल औंधे लेट कर दोनों हथेलियां कन्धों के नीचे जमा कर, धीरे dhire गर्दन, सीना और नाभि तक पेट ऊपर उठा कर छत की तरफ देखें | हाथों को सीधे न रख थोड़े मुड़े हुए रखें | सांस लेते रहे और १५ सांस लेकर वापिस जमीन पर सीना और मुख रख दें | ऐसा तीन बार करें | यौन-क्रिया करते समय भी शरीर इसी मुद्रा में रहता है अतः इस आसन का अभ्यास यौन-क्रिया करने की अद्भुत शक्ति प्रदान करता है क्यूंकि यह कमर और यौनांग प्रदेश को शक्तिशाली बनाता है और पेट का आकर छोटा करता है| यह आसन स्त्री व पुरुष दोनों के लिए उपयोगी है |

इन आसनो का अभ्यास खाली पेट प्रातः काल नियमित रूप से करने से शरीर निरोग और शक्तिशाली बनता है लिहाजा प्रसन्न मन और एकाग्रचित्त होकर प्रतिदिन इनका अभ्यास करना चाहिए |

Yoga Asanas and Yoga Poses for Women

अब हम सिर्फ महिलाओं के लिए ही कुछ ऐसे योगासनों का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो किशोरावस्था से लेकर प्रौढ़ावस्था तक की नवयुवतियों, तरुणियों एवं प्रौढ़ महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी एवं स्वास्थ्य रक्षक सिद्ध हुए हैं. शरीर को निरोग, स्वस्थ और सुडौल बनाये रखने के लिए इन योगासनों का नियमित अभ्यास करें.

किशोर अवस्था से ही युवतियों को ऐसी उचित, लाभकारी और ज़रूरी शिक्षा नहीं मिलती की वे अपने शरीर को ही नहीं बल्कि प्रजनन अंगों को भी कैसे स्वस्थ और बलवान रख सकती हैं और न कोई उन्हें आगामी विवाहित जीवन में सामने आने वाली समस्याओं से आगाह ही करता है. शादी होते ही बच्चे होने लगते हैं, जो पति-पत्नी जल्दी बच्चे नहीं चाहते वे अनचाहा गर्भाधान होने पर गर्भपात करवा देते हैं. आजकल के कामुक वातावरण , अश्लील साहित्य, पोर्न वेबसाइट्स और फिल्मों से प्रभावित पति-पत्नी सहवास करने में अति करते हैं जिनके परिणामस्वरूप स्त्री का शरीर व् प्रजनन अंग शिथिल, कमज़ोर और रोगग्रस्त हो जाता है. गर्भाशय ढीला और कमज़ोर होकर 'गर्भाशय भ्रंश' (prolapse of uterus ) की स्थिति बन जाती है. यहॉ वजह है की आजकल एक तो ऑपरेशन द्वारा गर्भाशय निकाल देने के केस आमतौर पर होते पाए जाने लगे हैं क्योंकि गर्भाशय के विकार से रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर और भारी मात्रा में स्त्राव होने की शिकायत होना आम हो गया है लिहाज़ा जब चिकित्सा से रक्तस्त्राव होना कम नहीं होता तब लेडी डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देती है और ऑपरेशन करवाना पड़ता है. दूसरे, ऐसी कमज़ोर महिलाएं पूरा गर्भकाल पर करने पर प्रसव के समय , प्रसव पीड़ा को, सहन नहीं कर पति लिहाज़ा उस वक़्त भी आपरेशन करना पड़ता है जिसे सीज़ेरियन डिलीवरी कहते हैं. ऐसी परिस्थितियों से बचने और अपने शरीर तथा प्रजनन अंगों को बलवान और स्वस्थ बनाये रखने के लिए हम यहाँ कुछ योगासनों का परिचय प्रस्तुत कर रहे हैं. ये आसन किशोर अवस्था से ही शुरू कर देना चाहिए. इन आसनों को स्वस्थ महिलाएं भी करें ताकि वे मुक्त हो सकें. इन योगासनों का अभ्यास सुबह नित्य कर्मों से निव्रत होकर खाली पेट करना चाहिए.

10) शशकासन (shashankasana, Sasakasana or shashkasan)
shashankasana, Sasakasana or shashkasan

वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों को सांस खींचते हुए ऊपर उठाएं और सांस बाहर फेंकते हुए सामने की तरफ, हाथ सीधे रखे हुए झुकाते जाएँ और दोनों हाथ ज़मीन पर रख दें. सांस सामान्य गति से लेते रहें. २०-२५ बार सांस लेकर, सांस अंदर खींचते हुए, ऊपर उठते हुए , सीधे बैठ जाएँ. बल का प्रयोग न करें और शुरू में जितना झुक सकें उतना ही झुकें. शशकासन पेट और कमर का मोटापा कम करता है, गर्भाशय एवं जाँघों को पुष्ट और मज़बूत बनाता है.

11 ) पवनमुक्तासन ( pawanmuktasana)
pawanmuktasana

पीठ के बल लेट कर, दोनों पैरों के घुटने मोड़ कर, दोनों हाथों से दोनों घुटनों को दबाते हुए हाथों की उँगलियाँ मिलाकर पकड़ लें और घुटनों को छाती की तरफ दबाते हुए गर्दन उठाएं. सर या ठोड़ी को घुटनों से लगाने की कोशिश करें , १५-२० बार सांस लें. धीरे धीरे अभ्यास होने पर मुद्रा लगने लगेगी. जिनको गर्दन में दर्द है वो गर्दन न उठायें, सिर्फ शेष मुद्रा लगाएं .

12) शक्तिचालिनी मुद्रा और अश्विनी मुद्रा (Shaktichalini mudra and Ashwini mudra ) - महिलाओं के लिए उपयोगी इन दोनों योग मुद्राओं का विवरण इसी आर्टिकल में ऊपर दिया जा चूका है.

13) वक्रासन ( Vakrasana , Vakrasan, Wakrasana or Wakrasana )
vakrasana

ज़मीन पर दोनों पैर लंबे करके बैठें. दाहिना पैर घुटने से मोड़ कर ऊँचा उठायें और इस पैर का तलवा बाएं पैर के घुटने के पास रखें. दाहिना हाथ पीठ के पीछे एक फुट की दूरी पर ज़मीन पर जमा के रखें. बाएं हाथ को घुटने व् छाती के बीच से निकल कर दाहिने पैर के टखने को या बाएं पैर के घुटने को छूने या पकड़ने की कोशिश करें. इस मुद्रा में १०-१५ बार सांस लेने तक स्थिर रहें. इसके बाद इसी प्रकार दूसरी तरफ से करें. यह वक्रासन बहुमूत्र रोग, पेड़ू का और पेट का मोटापा दूर करने व् मंदाग्नि दूर करने के लिए बहुत उपयोगी है.

14 ) विपरीतकर्णी मुद्रा (viparitakarani mudra )
viparitakarani mudra

गुरुत्वाकर्षण शक्ति की मदद से गर्भाशय भ्रंश ( prolapse of uterus ) की स्थिति को ठीक कर अपने सही स्थान पर लाने के लिए विपरीतकर्णी मुद्रा बहुत उपयोगी योगासन है. ज़मीन पर पीठ के बल चित्त लेट कर दोनों पैरों को कूल्हों से ऊपर उठायें. हाथों से सहारा देकर स्थिर रहकर २०-३० सांस लेना चाहिए. विपरीतकर्णी मुद्रा एक बार करना ही पर्याप्त होता है.

15 ) त्रिकोणासन ( trikonasana , trikon aasan )
trikonasana

दोनों पैरों को दो ढाई फिट के अंतर से रख कर खड़े हो जाएँ. अब पहले एक तरफ फिर दूसरी तरफ झुकें और झुकी हुई अवस्था में १०-१५ बार सांस लेकर खड़े हो जाएँ. फिर दूसरी तरफ झुक कर १०-१५ बार सांस लें. यह आसान करते समय शरीर को आगे या पीछे की ओर झुकने न दें. शुरू शुरू में, शरीर आसानी से जितना झुक सके उतना ही झुकाएं. बल का प्रयोग न करें. धीरे धीरे अभ्यास बढ़ता जायेगा. त्रिकोणासन कमर, पेट व् पेड़ू की मांसपेशियों को पुष्ट व् मज़बूत करता है ओर गर्भाशय का स्थान-भ्रंश नहीं होने देता है.

 

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